ऐसा करने से पंचायती राज संस्थाओं में गुणात्मक परिवर्तन आएगा, जिससे देहात के समुचित विकास में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में विकास के कार्यों को पढ़ी-लिखी पंचायतें नए आयाम देंगी।
उन्होंने यह बात नीलोखेड़ी के हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान में पंचायती राज विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए कही। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीपशिखा प्रज्जवलित करके किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में लगभग 10 व्यक्तियों की कमेटी बनाकर किस तरह का विकास करवाया जाना है, गांव की क्या-क्या आवश्यकताएं है,ं इन सभी विषयों को लेकर गांव के लोग विकास में बेहतर सहयोग करे, ऐसी व्यवस्था करने की जरूरत है। कारगर व्यवस्था तभी हो पाएगी जब पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अच्छा प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने कहा कि बनाए जाने वाली कमेटी में केवल विकास की बात करने वाले पूर्व सरपंच, पूर्व पंच, एक्स सर्विस मैन, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डॉक्टर या इंजीनियर आदि कोई भी शामिल किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार उन सभी विषयों पर विचार कर रही है, जिन पर हरियाणा बनने के बाद पिछले 50 वर्षों में किसी भी सरकार ने नहीं सोचा। सत्ता का सुख गांव के आंगन में हर सामान्य व्यक्ति को भी मिले, इसके लिए मौजूदा सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ प्रयासरत हैं।
उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि पंचायती राज चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में 51 हजार नये शौचालय चुनाव लड़ऩे वाले उम्मीदवारों ने स्वयं बनवाएं और इन्हीं चुनाव लड़ऩे वाले उम्मीदवारों ने सहकारी बैंकों के रूप में और बकाया बिजली बिलों के रूप में एक बड़ी राशि प्रदेश सरकार के राजस्व में जमा करवाई है। इस राशि से विकास कार्यों को और गति मिलेगी।
इस मौके पर हरियाणा के कृषि, सिंचाई, विकास एवं पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने राज्य की नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों की प्रशिक्षण की रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण विषय जैसे कि हरियाणा पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों, चुने हुए प्रतिनिधियों के कर्त्तव्य एवं कार्य, स्वर्ण जयन्ती योजनाएं, अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रम, ग्रामीण विकास हेतू महत्वपूर्ण बातें,नये समय की तकनीकी को हैंडल करने की क्षमताएं जैसे कि ई-पंचायत तथा सामाजिक आंकलन इत्यादि विषय शामिल किए जाएंगे तथा प्रशिक्षुओं को सफलता की कहानियां भी दिखाई जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, लेकिन महिलाओं ने जिला परिषद् की 43 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया है। इसी प्रकार सरपंचों में 41 प्रतिशत महिलाओं ने अपनी उपस्थिति का अहसास कराया है। उन्होंने यह भी कहा कि 330 बेटियां सरपंच बनी है। अब पंचायती राज संस्थाओं के सदस्य अंगूठा लगाने वाले नहीं बल्कि उंगली उठाकर काम करने वाले बने हैं।
पंचायत एवं विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज सन्धू ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री अशोक भगत तथा डॉ. कमल टावरी सहित हैदराबाद से भी कईं विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री कर्णदेव काम्बोज, मुख्य संसदीय सचिव बख्शीश सिंह विर्क, हैफेड के चेयरमैन एवं घरौंडा के विधायक हरविन्द्र कल्याण, भाजपा के जिलाध्यक्ष एवं नीलोखेड़ी के विधायक भगवान दास कबीरपंथी, ओएसडी अमरेन्द्र सिंह, एचआईआरडी के निदेशक पूर्ण सिंह यादव सहित अन्य मौजूद रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्त्रस्म में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अशोक भगत को वर्ष 2015 में पदमश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। झारखंड में आदिवासियों के उत्थान के लिए किये गए कार्यों के फलस्वरूप उन्हें यह सम्मान दिया गया था। पदम ंअशोक भगत ने झारखंड के लगभग 15 हजार गांवों में स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण,युवाओं में कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषाहार और शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया हैं।