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Karnal News: सियाराम समूह बना महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक

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सियाराम समूह बना महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक - फोटो : सियाराम समूह बना महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक
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- आठ से दस प्रकार के विशेष अचार बेचकर आर्थिक स्थिति की मजबूत
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। चिड़ाव गांव का सियाराम स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस समूह में 12 महिलाओं ने अपने घरेलू कौशल को व्यवसाय का रूप दिया है। वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
आठ वर्ष पहले बने इस समूह ने अचार निर्माण से अपनी पहचान बनाई है। शुरुआत में महिलाएं मेलों और स्थानीय आयोजनों में अचार बेचती थीं। अब वे हर सीजन के विशेष अचार तैयार करती हैं। समूह की पहुंच शहरों के बाजारों तक हो चुकी है। वे आम, नींबू जैसे पारंपरिक अचारों तक सीमित नहीं हैं। समूह आठ से दस प्रकार के विशेष अचार बनाता है। इनमें कच्चे बांस, कटहल, करेला और मेथी के अचार शामिल हैं। इन अचार की मांग दूसरे जिलों और राज्यों में भी बढ़ रही है। समूह की प्रधान राज ने बताया कि इसका निर्माण 2018 में हुआ था। महिलाओं का उद्देश्य बचत करना और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ना था। नाबार्ड ने महिलाओं को अचार निर्माण का प्रशिक्षण दिया।
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-हर महिला की अलग पहचान और जिम्मेदारी
समूह में शामिल 12 महिलाओं ने काम का बंटवारा किया है। कोई कच्चा माल जुटाने का कार्य देखती है तो कोई मसालों की तैयारी करती है। कुछ महिलाएं पैकिंग और विपणन का काम संभालती हैं। इस सामूहिक प्रयास से उत्पादन की गुणवत्ता भी बनी रहती है और सभी महिलाओं को रोजगार का अवसर भी मिलता है। महिलाओं का कहना है कि समूह में काम करने से न केवल उनकी आय बढ़ी है बल्कि आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
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अन्य राज्यों तक बनाई पहचान
समूह की सचिव सीमा बताती हैं कि वर्तमान में उनका समूह हर माह शहर के बाजारों तक अचार पहुंचा रहा है। स्थानीय मेलों, प्रदर्शनियों और विशेष आयोजनों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। इसके अलावा समूह की महिलाएं अन्य राज्यों में जाकर प्रशिक्षण भी देती हैं। लखनऊ, लुधियाना, चंडीगढ़, पानीपत और कई अन्य जिलों में समूह की महिलाएं अचार निर्माण का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष आयोजित गीता जयंती महोत्सव में एक से दो लाख तक की आय अर्जित हुई थी।
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