करनाल। अगर आप दुकानदार हैं और ऑनलाइन स्कैनर के माध्यम से भुगतान ले रहे हैं तो सावधान हो जाएं। जिलेभर में एक माह में करीब 20 दुकानदारों के खाते फ्रीज किए गए हैं। क्योंकि उनके बैंक खाते में साइबर अपराध का पैसा आ गया है। जबकि वह न तो साइबर अपराध के पीड़ित हैं और न ही आरोपी, फिर भी ट्रांजेक्शन होने पर उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा। भुगतान के समय में उनके खाते में जो राशि आई, वह कहीं साइबर ठगी के मामले में शामिल रही है।
साइबर ठग दुकानों से सामान खरीदकर ठगी की रकम खाते में ट्रांसफर कर रहे हैं। दुकानदार को इसका पता न होने के कारण मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दुकानदार खाता बंद होने पर बैंक में जाते हैं तो उन्हें साइबर थाने में जाने की सलाह दी जाती है। साइबर थाना पुलिस भी माथापच्ची करती है लेकिन जहां से राशि खाते में आई है, वहां से समाधान न होने के कारण पुलिस भी इन खातों को खुलवाने में असमर्थता जता रही है। कई दुकानदारों को तो दूसरे राज्यों की दौड़ लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर इन शिकायतों ने साइबर पुलिस की भी चिंता बढ़ा दी है। पुलिस खाते को खुलवाने के लिए प्रयास तो करती है लेकिन खाता खुल नहीं पाता। क्योंकि जहां से ठगी शुरू हुई है वहां की पुलिस और बैंक की पूरी जांच पड़ताल के बाद खाता खोला जाता है ऐसे में बहुत से लोगों के खाते फ्रीज हो रहे हैं।
मामले में 27 लेयर तक भी फ्रीज हो जाते हैं खाते
साइबर एक्सपर्ट सहायक निरीक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि साइबर ठगी की रकम आने पर 27 लेयर तक भी खाते फ्रीज हो जाते हैं। करनाल में हर माह ऐसी शिकायतें आ रही हैं। साइबर थाना पुलिस की ओर से बैंक को मेल की जाती है लेकिन जहां उस राशि को लेकर ठगी की प्राथमिकी दर्ज है, वहां से केस की जांच होने के बाद बैंक खाता खोलता है। उनका कहना है कि ऐसे मामले में लोकल साइबर थाना को 10 हजार रुपये तक की राशि के लेनदेन की अनुमति के साथ बैंक खातों को जांच के बाद खुलवाने की मंजूरी दे दी जाए तो बहुत समाधान हो सकता है।
केस : 1
300 रुपये का केक लिया, खाता हो गया फ्रीज
काछवा गांव निवासी अजय की गांव में ही केक की दुकान है। दिसंबर में 300 रुपये का सामान लेकर ग्राहक ने स्कैनर भेजकर उनके खाते में रुपये डलवाए थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि इस राशि के कारण उनका खाता फ्रीज हो जाएगा। जब एचडीएफसी बैंक में पता किया तो पता लगा कि इससे पहले आठ हजार रुपये की राशि भी आई है। इन दोनों राशियों को लेकर महाराष्ट्र और तेलंगाना में प्राथमिकी दर्ज हैं। अब खाता खुलवाने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस के पास जाना पड़ेगा। करनाल साइबर पुलिस को शिकायत दी, वहां केवल ये पता लगा कि उनके खाते को लेकर दो राज्यों में प्राथमिकी दर्ज है। ऐसे में वो खाते का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं।
केस : 2
खाते में आए 35 हजार रुपये अपने पास से लौटाए
गोशाला रोड के जनकपुरी निवासी दीपक ने बताया कि 18 अप्रैल 2024 को उनके केनरा बैंक के खाते में 35 हजार रुपये आ गए थे। इसके बाद उनका खाता बैंक की ओर से फ्रीज कर दिया गया। जब उन्होंने बैंक में पहुंचकर जानकारी जुटाई तो पता लगा कि उनके खाते में यह 35 हजार रुपये की राशि साइबर ठगी के माध्यम से आई है। इसके बाद उन्होंने खुद साइबर थाना में पहुंचकर जानकारी हासिल की। उन्हें पता लगा कि करनाल के ही हिंदी के लेक्चरर के साथ साइबर ठगी हुई थी, उनके खाते से यह राशि उनके पास पहुंची थी। उन्होंने अपने पास से ये राशि अध्यापक को दे दी है। इसके बाद भी उनका खाता व एक अन्य व्यक्ति का खाता फ्रीज है।
उच्चाधिकारियों को बैठक में दिया ठगी की रकम पर रोक लगाने का सुझाव : एलडीएम
करनाल के एलडीएम एसके हिंदुजा ने बताया कि ये बड़ी समस्या है। इसको लेकर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। उन्होंने सुझाव दिया है कि केवल ठगी की राशि पर रोक लगा दी जाए। बाकी राशि से उपभोक्ता अपना खाता संचालित करता रहे। वहीं ऐसे मामले में बैंक का साइबर सेल और पुलिस जांच के बाद बैंक मैनेजर लिखकर देता है। फिर जांच के बाद उस राशि को ब्लॉक कर दिया जाता है जबकि अन्य लेनदेन चालू कर दिया जाता है। अभी इस पर काम चल रहा है।