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मन में जागे शूटिंग के अरमान तो उठाई राइफल, जीत लिए 17 मेडल

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shooter Rashmi won 17 medels
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मन में जागे शूटिंग के अरमान, नाजुक हाथों ने उठाई राइफल और जीत लिए स्टेट लेवल पर 15 मेडल। नेशनल लेवल पर दो गोल्ड। लड़कियों को कम आंकने वाले लोगों को आइना दिखा रही हैं निशानेबाज रश्मि।
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रिश्म के माता-पिता यूपी के शामली जिले में रहते हैं। भाई राजीव ने निशानेबाजी सीखने के लिए करनाल का रुख किया तो बहन भी निशानेबाजी सीखने के लिए करनाल आ गई और आज करनाल की शान बन गईं।
32 वर्षीय रश्मि ने बताया कि उनका भाई निशानेबाजी करता है, उसी को देखकर उसके मन में निशानेबाजी बननी की चाहत जगी। जब पहली बार राइफल उठाई जो लोगों ने कहा कि बेटी को बढ़ाई लिखाई करवाओ, लेकिन रश्मि के पिता ब्रह्मपाल और माता कुसुम ने सिर्फ अपनी बेटी के दिल की आवाज सुनी।
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भाई राजीव मलिक को जब पता चला कि उसकी बहन निशानेबाज बनना चाहती है तो उसने दिल्ली में अपनी प्रैक्टिस छोड़ कर करनाल से 17 किलोमीटर दूर अपने खेत में बने फार्म हाउस पर रश्मि को प्रशिक्षण देना शुरू किया। भाई ने फार्म हाउस पर ही शूटिंग रेंज बना दी।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक टारगेट की बजाय लोहे के फ्रेम बनाए। हालांकि, सुविधाएं कम थी, लेकिन बहन रश्मि के अरमान उससे कहीं ऊंचे थे, रश्मि का हौसला भी काफी बुलंद था। एक बार निशाना लगाने के बाद वह 50 मीटर दौड़ कर देखने जाती और फिर दूसरा टारगेट लगाती।
बकौल रश्मि बताती है कि वह सुबह शाम 5 से 6 घंटे कड़ा अभ्यास करती थी। फार्म हाउस तक जाने के लिए हर रोज करीब 34 किलोमीटर का सफर तय करती। 2005 में निशानेबाजी शुरू की और 2006 में पहली बार 19 साल की बेटी ने मैदान में उतरते ही 6 मेडलों पर निशाना साधा। यही नहीं उन्हें यूपी में बेस्ट शूटर के खिताब से नवाजा गया, उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
2005 से अब तक जीत चुकी है 17 मेडल
रश्मि ने 2005 से निशानेबाजी में अपना करियर शुरू किया और अब तक स्टेट लेवल और नेशनल लेवल पर अब तक 17 मेडल जीत चुकी है। वर्ष 2011 में कादरपुर में आयोजित 14वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर सुर्खियों में आई, 2012 में गुरुग्राम में हुई नेशनल प्रतियोगिता में फिर से ब्रांज मेडल जीता। जर्मनी में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में कोच भूमिका निभाई। अब राष्ट्रस्तरीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में भी कोच के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
अब कर रहीं निशानेबाज तैयार
रश्मि का मकसद शूटिंग में बेटियों को आगे बढ़ाना है। सपना संजोए रखा है कि करनाल की बेटियां ओलंपिक में गोल्ड मेडल लेकर आए। बेटियों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए करनाल में सेक्टर-7 में शूटिंग अकादमी खोली, ताकि शहर की बेटियों का हुनर निखार सकें।
आज यांगची, अनिरुद्घ राणा, अमन संधू, शुभम राणा, सुधीर, अनमोल आदि उनके पास शूटिंग का अभ्यास करने आते हैं यही नहीं उनके पास 55 साल के प्रोफेसर रामपाल भी शूटिंग की बारीकियां सीखने आते हैं, राहगीरी में हर रविवार युवाओं को फ्री में शूटिंग के गुर देती है।
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