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Karnal News: शरद पूर्णिमा आज... चंद्रमा की किरणों से बरसेंगी अमृत की बूंदें

Mon, 06 Oct 2025 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। शरद पूर्णिमा यानी चंद्रमा के अपने सोलह कलाओं से परिपूर्ण होने की रात। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इसलिए लोग रात खीर चंद्रमा की किरणों के लिए खुले में रखते हैं, जिसे सुबह खाया जाता है। सभी घरों में मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी। मंदिरों में पूजन किया जाएगा।
श्री बालाजी ज्योतिष केंद्र के संचालन पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि सोमवार को अश्विनी शुक्ल पक्ष चतुर्दशी में ही श्री सत्यनारायण भगवान का व्रत किया जाएगा। इसी दिन शरद पूर्णिमा उत्सव भी मनाया जाएगा। इस बार 6 और 7 अक्तूबर, दोनों तिथियों को शरद पूर्णिमा उत्सव रहेगा। उन्होंने बताया कि प्राचीन मान्यता है कि इस दिन रात को खीर बनाकर उसे चंद्र की करने के सामने रखा जाता है और प्रातः काल ठाकुर जी को भोग लगाकर इस खीर को खाया जाता है।
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मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी सोलद कलाओं से परिपूर्ण होता है, उसकी किरणों से अमृत की बारिश होती है, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी है, ये आयु में वृद्धि करती है। अश्विनी शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से कार्तिक स्नान प्रारंभ हो जाता है, जो सात अक्तूबर की सुबह 9:17 से प्रारंभ हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा का व्रत व्यवसाय में वृद्धि और संतान सुख प्राप्ति के लिए किया जाता है।
पूर्णिमा का समय
अश्विनी शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 6 अक्तूबर दोपहर 12:24 बजे के बाद प्रारंभ हो जाएगी और मंगलवार को सुबह 9:17 तक रहेगी। चंद्र उदय व्यापिनी पूर्णिमा तिथि छह अक्तूबर सोमवार को पड़ती है, इसलिए भगवान श्री सत्यनारायण जी का व्रत भी सोमवार को ही किया जाएगा।
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करते हैं लक्ष्मी पूजा
- धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि माना जाता है कि वे इस रात धरती पर आती हैं। इस शुभ तिथि पर गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। आयुर्वेद में चंद्रमा को मन का कारक और औषधियों का स्वामी माना जाता है। इस रात चंद्र किरणों से अमृत गुण आता है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन मिलता है।
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