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करनाल से भी गुजरेगा शामली-अंबाला छह लेन हाईवे

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संवाद न्यूज एजेंसी
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इंद्री (करनाल)। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब को जोड़ने वाले 121 किलोमीटर लंबे शामली से अंबाला तक छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे बनाने की तैयारियां शुरू कर दी है। यह हाईवे करनाल जिले में सात किमी में आने वाले चार गांवों से होकर गुजरेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करनाल द्वारा इंद्री बीडीपीओ कार्यालय के सभागार में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तहत छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें एडीसी योगेश कुमार, एसडीएम सुमित सिहाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा, नेशनल हाईवे के उच्चाधिकारी और संबंधित गांवों के किसानों ने भाग लिया।
अतिरिक्त उपायुक्त योगेश कुमार ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा उतर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब राज्यों में भारत माला परियोजना के तहत यूपी के शामली से हरियाणा के अंबाला तक छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे लगभग 121 किलोमीटर का निर्माण होने जा रहा है। जिसके लिए इंद्री क्षेत्र के चंद्राव, हंसुमाजरा, खुखनी व कलरी जागीर गांव के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। कार्यक्रम में संबंधित गांवों के किसानों ने अधिकारियों के सामने अधिगृहित भूमि का मुआवजा देने, नेशनल हाईवे के दोनों भूमि विभाजित होने बारे, पानी की निकासी सहित तमाम प्रकार की समस्याएं एवं शिकायतें रखीं। जिनका अधिकारियों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
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कृषि उत्पादक राज्यों को जोड़ने का होगा काम
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तकनीकी प्रबंधक अंकुश मेहता ने बताया कि प्रस्तावित राजमार्ग प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब को जोड़ने का काम करेगा। इसके अलावा राजमार्ग का निर्माण होने से क्षेत्र में औद्योगिक विकास भी बढ़ेगा। राजमार्ग के साथ लगते गांवों के लोगों को बेहतर सड़क मिलेगी। जिससे व्यापार बढ़ेगा ओर अर्थ व्यवस्था में सुधार होगा। हाईवे से करनाल जिले को भी बड़ा लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
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तीन राज्यों को जोड़ने वाला यह हाईवे करनाल जिले की सीमा से होकर सात किमी क्षेत्र में चार गांवों से निकलेगा। अभी तक इन चार गांवों के लोगों की बात सुनी गई है, उनकी आपत्तियां ली गई हैं, जिनका निराकरण होने के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी तभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वीकृति मिलेगी।
- शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करनाल
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