घरौंडा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत डिपो में खराब गेहूं पहुंचने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जमकर हंगामा किया।
लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के साथ मजाक कर रही है। यही कारण है कि उन्हें गला सड़ा अनाज भेजा जा रहा है। लोगोें का कहना था कि कई बार गेहूं की सप्लाई बेकार आती है, जोकि पशुओं के खाने के लायक नहीं होता। बाद में विभाग की ओर से भरोसा दिया गया कि गेहूं को बदलवा देंगे तो लोग शांत हुए।
वार्ड 14 के डिपो में सार्वजनिक प्रणाली के तहत लगभग 21 क्विंटल गेहूं भेजा गया था। गेहूं की सप्लाई आने के बाद वितरण नहीं होने के कारण वार्डवासियों ने इसकी शिकायत पुरुषोत्तम सेठी से की। उन्होंने डिपो होल्डर को सप्लाई वितरण करने के लिए कहा। वार्डवासी व पार्षद डिपो पर पहुंच गए।
डिपो होल्डर ने गेहूं वितरण के लिए कट्टे खोले तो गेहूं की सप्लाई देखकर लोग दंग रह गए। कट्टों में आया गेहूं पूरी तरह से खराब था और मोटे-मोटे गोले बने हुए थे। गेहूं देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे यह बारिश का भीगा हुआ हो। गंदा गेहूं देख लोगाें का गुस्सा फुट पड़ा और उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जमकर बवाल काटा।
पार्षद के पति पुरुषोत्तम सेठी, कृष्ण कौर, सरिता, अमरीक सिंह, राजसिंह ने बताया कि पिछले माह गेहूं की सप्लाई नहीं आई और इस माह सप्लाई आई तो वह भी बिल्कुल खराब है। गेहूं बिल्कुल काला है और मोटे-मोटे गोले बने हुए हैं। विभाग की और भेजा गया गेहूं खाने के लायक नहीं है।
इतना गंदा गेहूं तो पशु भी नहीं खा सकते है। पार्षद के पति ने बताया कि गेहूं खराब आने की कई बार विभाग को शिकायत कर चुके हैं लेकिन विभाग ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने चेताया कि अगर दोबारा इस प्रकार की सप्लाई आई तो प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने तुरंत गेहूं बदलने की मांग की। डिपो होल्डर प्रीतम सिंह ने इस मामले के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों से बातचीत की तो उन्होंने ने तुरंत गेहूं बदलने का आश्वासन दिया। गेहूं बदलने का आश्वासन मिलने के बाद वार्ड वासी शांत हुए। डिपो होल्डर प्रीतम सिंह ने बताया कि वितरण के लिए 21 क्विंटल गेहूं आया था।
इसको वितरित करने के लिए गेहूं के कट्टे खोले तो उसमें यह खराब पाया गया। इस मामले में विभाग के उच्च अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है और सोमवार तक गेहूं बदला जाएगा।
दूसरी सप्लाई वितरण के लिए भेजी जाएगी
जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी रविंद्र मलिक ने बताया कि सार्वजनिक प्रणाली के तहत इस माह कई डिपो पर गलत गेहूं भेजे जाने की शिकायत मिली है।
जिन डिपों पर गेहूं खराब गया है, तुरंत बदला जाएगा और दूसरी सप्लाई वितरण के लिए भेजी जाएगी। मामले की जांच करेंगे।
सरकार के खिलाफ गरजे किसान
असंध के गांव फफड़ाना स्थित हैफेड शुगर मिल का इस वर्ष का पिराई सत्र बीस नवंबर से शुरू करवाने की मांग के लिए मिल परिसर में असंध क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों की बैठक बुलाई गई।
गन्ना किसान संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्रित विभिन्न गांवों के किसानों ने सरकार, प्रशासन व मिल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि यदि बीस नवंबर के आसपास पिराई सत्र शुरू नहीं किया गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
गन्ना किसान संघर्ष समिति प्रधान बिजेंद्र राणा ने बताया कि गत आठ नवंबर को उन्होंने मिल महाप्रबंधक व एसडीएम विक्रम मलिक से मुलाकात कर बीस नवंबर को पिराई सत्र शुरू करवाने की मांग की थी। अब स्थिति यह है कि इस तारीख के आसपास पिराई सत्र शुरू होने की उम्मीद में किसानों ने अपने यहां उत्तर प्रदेश व अन्य जगहों से मजदूर भी मंगवा लिए हैं।
ऐसे मजदूरों को गन्ने के रकबे प्रति किसान पचास हजार तक पेशगी रकम भी दे चुके हैं। बीस नवंबर को सत्र नहीं शुरू हुआ तो न केवल मजदूर ही उनके हाथ से निकल सकते हैं, बल्कि रकम भी डूबने के लाले पड़ सकते हैं। गन्ने की मुड्डा फसल कटने के बाद जिन किसानों ने खाली हुए खेत में गेहूं की बिजाई करने की योजना बनाई हुई है, वे भी इससे वंचित रह जाएंगे।
इसका कारण यह है कि मिल प्रबंधन की ओर से पिराई सत्र तीन दिसंबर से शुरू करने की घोषणा की गई है और तब तक गेहूं की बिजाई का समय निकल जाएगा। कोई अन्य विकल्प सामने नहीं होने से किसानों के खेत बिना बिजाई के खाली रह जाएंगे। मौके पर सतेंद्र संधू, राजसिंह, अर्जुन धर्मगढ़, नौरंग, जयबीर, जगीर सिंह, पंजाब सिंह, रविंद्र, राजेश, मेहर सिंह, राममेहर मलिक, सुरेश, कर्मबीर, ओम सिंह, हरपाल, नेत्रपाल ने विचार रखे।
उधर, शुगर केन प्रबंधक व मिल के अतिरिक्त महाप्रबंधक बीएस चहल ने बताया कि मिल विशेषज्ञों की ओर से क्षेत्र में खड़ी गन्ने की अगेती फसल से चीनी की रिकवरी का प्रयोगशाला परीक्षण कराया था। इस समय इसका स्तर निर्धारित मानदंड से काफी नीचे है।
इससे मिल के साथ-साथ किसानों को भी नुकसान हुआ है। वैसे भी सत्र प्रारंभ करने का निर्णय स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि हेड ऑफिस स्तर पर लिया जाता है। गत वर्ष भी सत्र की शुरुआत तीन दिसंबर को हुई थी और मौजूदा सत्र प्रारंभ करने के लिए भी तीन दिसंबर का दिन निर्धारित किया गया है।