कुरुक्षेत्र के 164 साल पुराने राजस्व रिकार्ड में मालिकाना हक वाली बेशकीमती जमीन लुटने के लिए क्यों छोड़ी गई, अब यह खुलासा जल्द हो सकता है।
पता चला है कि कुरुक्षेत्र के डीसी निखिल गजराज ने इस मामले की जांच एसडीएम अशोक बांसल को सौंपी है। गौरतलब है कि नगर परिषद ऑफिस कांप्लेक्स के ठीक सामने कच्चे घेर मार्केट में करीब एक हजार गज सरकारी भूमि है। राजस्व विभाग के पुराने रिकार्ड में वर्ष 1849 से इस भूमि का असली मालिकाना हक थानेसर नगर परिषद का है।
वहीं निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट तक इस भूमि का असली मालिक थानेसर परिषद को मान चुकी है। इसके बावजूद सितंबर 2013 में नगर परिषद की इस जगह के एक हिस्से पर मिलीभगत के चलते दुकान बना ली गई। बीते 20 और 21 सितंबर को इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। तब डीसी के संज्ञान में लाने पर उन्होंने इसे गंभीरता से लेने के साथ कार्रवाई का भरोसा दिया था।
वहीं थानेसर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य जयनारायण शर्मा ने अगले दिन अमर उजाला में प्रकाशित खबर की प्रति डीसी निखिल गजराज, मुख्यमंत्री, स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक और स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को भेजी थी। इस सरकार ने जांच कराने के आदेश दिए हैं। डीसी ने मामले की जांच थानेसर के एसडीएम अशोक बंसल को सौंप दी है। सोमवार को थानेसर नगर परिषद के एग्जीक्यूटिव आफिसर एमएस जगत के कार्यालय में एसडीएम बांसल ने यह जांच शुरू की है।
क्या आपकी जमीन होती तो छोड़ देते
जांच के दौरान नगर परिषद के एक अधिकारी ने कहा कि जिस जमीन पर कब्जा हुआ है, उस पर बैठे लोग करीब 50 साल से बैठे हैं, इस पर जांचधिकारी एसडीएम ने कहा कि क्या आपकी निजी जमीन होती छोड़ देते। एसडीएम ने कहा अदालतें और तमाम रिकार्ड थानेसर नगर परिषद को इस जमीन का वास्तविक मालिक होने का अधिकार दे रहे हैं।
164 साल पुराने मालिकाना हक पर भारी
सन 1849 के रिकार्ड के अनुसार कच्चा घेर थानेसर नगर परिषद की प्रापर्टी है। इसे बाकायदा नक्शा बनाकर नगर परिषद के प्रापर्टी रजिस्टर में इंद्राज कराया हुआ है। कई दशक पहले थानेसर नगर परिषद (तत्कालीन नगर पालिका) ने 9 खोखे 9 लोगों (हरिओम, मालाराम, रामचंद्र, पवनकुमार, अमरजीत, नेतराम, शिव कुमार और दो खोखे अग्रवाल स्टेशनरी) को मासिक तहबाजारी पर दिए थे। बाद में इन लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों से इस जमीन की रजिस्टरी अपने नाम करा ली।