करनाल। ओवरलोड वाहनों को चलाने के लिए ट्रांसपोर्टर्स के मुखबिर फिर सक्रिय हो गए हैं। ये परिवहन विभाग की जांच टीम की पल-पल की जानकारी वाहन चालकों तक पहुंचा रहे हैं। जांच के लिए जैसे ही कार्यालय से टीम निकलती है, उधर सूचना मिलते ही ओवरलोड चलने वाले वाहनों के पहिये थम जाते हैं या फिर रास्ते बदलकर निकलते हैं। करनाल और कुरुक्षेत्र में ऐसा कई दिनों से हो रहा है। इस कारण ओवरलोड चलने वाले ज्यादातर वाहनों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ट्रांसपोर्टर्स के मुखबिर कार, स्कूटर और बाइक से परिवहन विभाग की जांच टीम का पीछा कर रहे हैं। अलग-अलग मार्ग पर जांच टीम के पीछे अक्सर चलने वाले आठ वाहनों की टीम ने पहचान कर ली है। इनके वाहन पंजीकरण नंबर के आधार पर ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी। ऐसे वाहनों को डीटीओ कार्यालय के नजदीक घूमते भी देखा गया है। ये व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से वाहन चालकों को जांच टीम की लोकेशन शेयर करते हैं। सवा साल पहले परिवहन विभाग में पुलिस कर्मचारियों की तैनाती कर ओवरलोड वाहनों की जांच का कार्य उन्हें सौंप दिया गया था। पिछले चार साल में वाहन माफिया के 11 से ज्यादा लोगों को जांच टीम की लोकेशन शेयर करते हुए पकड़ा जा चुका है।
अब तक ये मामले आ चुके
- 30 जुलाई को मेरठ रोड पर गांव मंगलौरा के पास जांच टीम की लोकेशन शेयर करते हुए मंगलौर निवासी एक व्यक्ति को पकड़ा था। आरोपी के कब्जे से एक बाइक और मोबाइल बरामद हुआ था।
- जनवरी 2020 में बलड़ी चौक के नजदीक से जांच टीम की लोकेशन शेयर करने के मामले में तीन आरोपियों को पकड़ा गया था।
- 14 जुलाई 2018 को सीआईए-1 टीम ने परिवहन विभाग की जांच टीम की लोकेशन शेयर करने वाले एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था।
- 12 अक्तूबर 2017 को एनडीआरआई चौक के पास जांच टीम की लोकेशन ट्रांसपोर्टरों तक पहुंचाने वाले एक व्यक्ति को पकड़ा था। जांच में उसके मोबाइल से कई व्हाट्सएप ग्रुपों में जांच टीम की गाड़ी की फोटो शेयर की गई मिली थी।
हर गाड़ी निकलवाने के बदले मिलते हैं दो हजार रुपये
करनाल के अलावा झज्जर, कुरुक्षेत्र और अन्य जिलों के नंबर की गाड़ियां जांच टीम का पीछा करती हैं। पिछले मामलों में हुई जांच में सामने आया कि वाहन चालकों के व्हाट्सएप ग्रुप बने हैं। इसमें कई ट्रांसपोर्टर उसके साथ जुड़े हैं। यहां मैसेज के जरिए आरटीए की जांच टीम की लोकेशन उनसे शेयर की जाती है ताकि जो भी रूट बिना चेकिंग का हो, वहां से ट्रांसपोर्टर अपनी गाड़ी आसानी से निकाल सकें। गाड़ी निकलवाने के लिए उनके रेट भी निर्धारित हैं। गाड़ी निकलने के बाद ट्रांसपोर्टर ग्रुप में सूचना डालने वाले को प्रति गाड़ी 1500 से 2000 रुपये के हिसाब से भुगतान करते हैं।
पिछले कुछ दिनों से जांच टीम का पीछा हो रहा है। कुछ गाड़ियों के नंबर भी नोट किए हैं। इनमें करनाल के अलावा बाहर के पंजीकृत नंबर के भी ये वाहन हैं। करनाल के अलावा कुरुक्षेत्र में भी ऐसा हो रहा है। सभी पर कार्रवाई करने के लिए योजना बना रहे हैं।
- उर्मिल श्योकंद, डीटीओ