संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। लॉकडाउन के कारण डेढ़ साल में छोटे बच्चों की पढ़ने की आदत पूरी तरह छूट गई। ऐसे में अब उन्हें स्कूल में पढ़ाई करने और पाठ्यक्रम को समझने में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन अब यह समस्या ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। विद्यार्थी खेल-खेल में और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से ज्ञान लेंगे। इसके लिए प्रदेश के राजकीय स्कूलों में रॉकेट लर्निंग कोर्स कार्यक्रम शुरू किया गया है।
महाराष्ट्र और यूपी की तर्ज पर शिक्षा विभाग की ओर से शुरू हुए इस खास कार्यक्रम में शुरुआत में केवल कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों को ही शामिल किया गया है। जिनके लिए रोजाना 20 मिनट की गतिविधियां होंगी। व्हाट्सएप के माध्यम से होम वर्क के रूप में इन गतिविधियों का काम बच्चों को भेजा जाएगा। जिसमें अभिभावक भी हिस्सा लेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभिभावकों और विद्यार्थियों को हर सप्ताह पुरस्कार भी दिया जाएगा। रॉकेट लर्निंग नाम की दिल्ली की एनजीओ इस कार्यक्रम का संचालन करेगी।
दाल के दानों से संख्या लिखना, गोले में कूदने जैसी रोचक गतिविधियां
गतिविधियों के लिए एससीईआरटी, एजूसेट और अवसर एप के पाठ्यक्र म को हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत गणित के अंकों की पहचान कराने के लिए दाल या चावल के दानों से संख्या बनाना और उन्हें गिनने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। वहीं स्मॉल एंड बिग की पहचान के लिए छोटे से बड़े गोले में कूदना, जितना नंबर ऑडियो में बोला जाए, उतनी बार ताली बजाना या कूदने जैसी गतिविधियां भी होंगी। हर सप्ताह गतिविधियों से विद्यार्थी जो कुछ सीखेंगे उस पर आधारित प्रश्नोत्तरी भी होगी। गलत उत्तर देने वालों को वीडियो के माध्यम से समझाया जाएगा।
विद्यार्थियों को पदक और परिवार को मिलेगा खिताब
सबसे पहले और रोजाना काम पूरा करने वाले परिवार को सुपर परिवार का खिताब देते हैं। इसके अलावा निरंतर जुड़े रहने वालों विद्यार्थियों के परिवार को सक्रिय परिवार के तहत पदक जारी किए जाते हैं। पूरा माह गतिविधि करके रिपोर्ट कार्ड जमा कराने वाले श्रेष्ठ विद्यार्थी को स्वर्ण, तीन सप्ताह की गतिविधियों में शामिल रहने वाले को सिल्वर पदक मिलता है।
45 हजार सक्रिय प्रशिक्षु बने
एनजीओ के प्रशिक्षक विश्वराज ने बताया कि लॉकडाउन के बाद पढ़ाई में शिक्षकों की मदद करना और विद्यार्थियों के साथ-साथ पढ़ाई से अभिभावकों को भी जोड़ना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इसके तहत बच्चों में भी पढ़ाई के प्रति एवं स्कूल जाने में रुचि पैदा होगी। बैंगलोर से भी गतिविधियों के लिए पाठ्यक्रम जारी होता है। संस्था के विभिन्न प्रदेशों में अब तक 45 हजार सक्रिय प्रशिक्षु हैं।
फिलहाल करनाल के 300 स्कूलों को कार्यक्रम में शामिल किया गया है। वे शुरुआत में अपने अनुभव, आइडिया और विचारों को साझा करेेंगे। इसके बाद कार्यक्रम के तहत रोजाना की गतिविधियां शुरू होंगी।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।