प्रदेश सरकार और प्रदेशभर के राइस मिलर्स के बीच सोमवार को कर्ण लेक पर
हुई दो चरणों की वार्ता विफल हो गई। इसके साथ ही प्रदेशभर के राइस मिलर्स
ने सरकारी धान को न खरीदने का निर्णय लेकर सोमवार से ही हड़ताल की घोषणा भी
कर दी। अब प्रदेश की किसी भी अनाज मंडी में राइस मिलर्स सरकारी धान की
खरीद नहीं करेंगे। हालांकि प्राइवेट एजेंसी से खरीदे गए धान की खरीद जारी
रहेगी।
सुबह 12 बजे तीन मांगों को लेकर कर्ण लेक पर प्रदेश भर के राइस
मिलर्स और प्रदेश सरकार के प्रतिनिधिमंडल की बैठक रखी गई थी। सुबह साढ़े 12
बजे एडिशनल चीफ सेक्रेटरी एसएस प्रसाद और डायरेक्टर जनरल सीएस राणा के
साथ-साथ करनाल के डीसी डॉ. जे. गणेशन ने प्रदेशभर के राइस मिलर्स की मांगों
को सुना। राइस मिलर्स ने 2013-14 का होल्डिंग चार्जिज और डेमेज कट जोकि
काटा गया था, उसे वापस करने, वर्ष 2014 में सीएमआर (कस्टम मीलिंग राइस) की
जो पॉलिसी थी, वही इस बार भी हो व दूसरे राज्यों से सी फोरम पर चावल
मंगवाकर सेल करते हैं, उस पर कोई वैट न लगाया जाए। इस समय यह 5.25 प्रतिशत
है। \
राइस मिलर्स ने इन तीनों मांगों को लिखित रूप से पूरा करने की मांग की।
करीब आधे घंटे तक बातचीत चली, लेकिन लिखित आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद
राइस मिलर्स ने बैठक से बाहर जाकर प्रदेशभर से पहुंचे राइस मिलर्स से बात
की। राइस मिलर्स ने कहा कि लिखित आश्वासन के बिना वह खरीद शुरू नहीं
करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब सवा दो बजे दूसरे चरण की फिर वार्ता चली। एसएस
प्रसाद ने मुख्यमंत्री व अन्य से बात कर 1 महीने के अंदर-अंदर दो मांगों
को पूरा करने का आश्वासन दिया, लेकिन राइस मिलर्स लिखित की मांग पर अड़े
रहे। अलबत्ता बैठक बेनतीजा रही। बैठक मेें राइस मिलर्स के प्रदेश कार्यकारी
अध्यक्ष जयपाल जैन, पूर्व स्टेट प्रधान आजाद राठी, सतपाल गुप्ता अंबाला
पूर्व प्रधान, विष्णु भगवान मित्तल कैथल प्रदेश चेयरमैन, राजकुमार गुप्ता
करनाल प्रधान, प्रमोद धवन कुरुक्षेत्र प्रधान, मांगे राम कैथल प्रधान,
विनोद गोयल महासचिव व हंसराज चीका सहित जितेंद्र अग्रवाल मौजूद थे।
क्यों नहीं माने आश्वासन पर राइस मिलर्स
दरअसल
एसएस प्रसाद ने लिखित आश्वासन नहीं दिया। साथ ही कहा कि एक माह का समय दे
दो। राइस मिलर्स का कहना था कि एक माह के भीतर तो सारा खरीद कार्य ही पूरा
हो जाएगा। इसके बाद उन्हें फिर से अगले साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। राइस
मिलर्स को लगा कि सरकार उनके साथ फिर से चाल चल रही है। इसी कारण कोई
समझौता नहीं हुआ।
कैथल व यमुनानगर के राइस मिलर्स के कारण हुई दो फाड़
दूसरे
चरण की बैठक के दौरान 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सरकारी अधिकारियों से बात
कर रहा था। लिखित आश्वासन नहीं मिलने से चीका से हंसराज उखड़कर बैठक से
बाहर चल दिए। उन्होंने कहा कि कोई खरीद करे न करे हम खरीद नहीं करेंगे।
उनका समर्थन करते हुए कुरुक्षेत्र व करनाल के राइस मिलर्स भी उनके पीछे चल
दिए। इस दौरान कैथल के जगदीश अग्रवाल व मांगेराम सहित अन्य कैथल के मिलर्स
एसएस प्रसाद को बोलकर चल दिए कि वह सरकार का जितना भी धान होगा उसे
खरीदेंगे। इसी प्रकार यमुनानगर से राजेंद्र अग्रवाल ने एसएस प्रसाद से कल
(मंगलवार) शाम तक का बातचीत का समय मांगा।
वार्ता अभी पूरी तरह से
विफल नहीं हुई है। हमें कैथल वालों ने धान खरीदने का आश्वासन दिया है। कुछ
ने कल शाम तक का समय भी मांगा है। यदि बात नहीं बनी तो रणनीति तय करेंगे।
उस रणनीति को अभी मीडिया को नहीं बताएंगे। एक्सपोर्टर्स के साथ हमारी बात
हुई है। वे हमारे साथ हैं। बैठक में कुछ राइस मिलर्स सहमत हो गए थे, कुछ
नहीं हो पाए। राइस मिलर्स की मांगें भारत सरकार और सीएजी लेवल की हैं उन पर
हम एकदम अपने स्तर पर नहीं मान सकते।
एसएस प्रसाद, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी।
हम
कैथल में अपनी बिरादरी से बात कर रहे हैं। उन्हें हरियाणा के राइस मिलर्स
के फैसले को भी बता देंगे और उनका भी पूछ लेंगे। इसके बाद जो फैसला लिया
जाएगा वही माना जाएगा।
जगदीश अग्रवाल, राइस मिलर कैथल।
हमारी
एसोसिएशन एकजुट है। राजेंद्र जी ने अंदर जो कहा उसके बाद बाहर निकलकर हमारी
आपस में बात हो गई है। न तो यमुनानगर वाले सरकारी धान की खरीद करेंगे न ही
कैथल वाले। जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती तब तक एक भी दाना सरकारी धान
का खरीदा नहीं जाएगा।
- जयपाल जैन, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा राइस मिलर्स एंड एसो.
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फोटो कैप्शन 06- एसएस प्रसाद को धान खरीदने का आश्वासन देते कैथल के राइस मिलर्स।
फोटो कैप्शन 05-बैठक में लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर नाराज होकर बैठक से निकलते प्रदेशभर के राइस मिलर्स।