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अनुसंधान विशेष : इस वर्ष गन्ने की दो और प्रजातियां होंगी रिलीज

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करनाल। भारतीय कृषि वैज्ञानिक गन्ने की बेहतर किस्मों के लिए निरंतर शोध कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आने वाले वर्षों में खेतों में गन्ने की दो नई किस्में लहलहाएंगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल ने इस वर्ष गन्ने की दो और नई उत्कृष्ट प्रजातियां सीओ-16034 और सीओ-1718 ईजाद की हैं। इसके जल्द रिलीज होने की उम्मीद है। फिलहाल ये प्रजातियां पाइपलाइन में हैं। उत्पादन क्षमता और गुणों में ये किस्में सीओ-0238 प्रजाति के समान होंगी।
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गन्ना प्रजनन संस्थान (आईसीएआर) कोयंबटूर की निदेशक डॉ. जी. हेमप्रभा और केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडे ने विशेष बातचीत के दौरान बताया कि अनुसंधान कार्य पूरा होने पर इन किस्मों को रिलीज किया जाएगा। डॉ. हेमप्रभा शनिवार को गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल आई हुई थीं। उन्होंने कहा कि करनाल स्थित केंद्र से गन्ना की जो भी प्रजातियां विकसित की जाती हैं उनके नाम दानवीर कर्ण के नाम पर रखे जाते हैं। यह ऐतिहासिक एवं अनुसंधान नगरी महाभारत के योद्धा राजा कर्ण के नाम से विख्यात है। उन्होंने कहा कि कर्ण-4 (सीओ-0238) प्रजाति देशवासियों के लिए वरदान बनी। इस किस्म में लाल सड़न रोग आने के कारण इसके क्षेत्रफल को अन्य प्रजातियों में परिवर्तित करने के प्रयास करते रहेंगे। अति अगेती एवं अद्भुत सीओ-15023 किस्म करनाल केंद्र से किसानों को दिया जा चुका है।
डॉ. हेमप्रभा ने कहा कि भारत में चीनी की घरेलू खपत करीब 27 मीलियन टन है। वर्ष 2021 में 7.5 लाख टन चीनी निर्यात किया गया। 2021-22 में देश में करीब 400 मिलियिन टन गन्ना उत्पादन हुआ। चीनी का उत्पादन करीब करीब 35.5 मिलियन टन हुआ है। हमारे पास सरप्लस चीनी का बफर स्टॉक है। केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात बंद कर दिया है। अगले वर्ष हमें 20 मिलियन टन चीनी चाहिए। इस आंकड़े के बाद शेष गन्ना जूस का अधिक इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाएगा। चीनी मिलों में बी-हैवी मोलासिस प्रक्रिया में ही जूस को इथेनाल में परिवर्तित करेंगे।
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उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि में उच्च तकनीकों का समावेश होगा। मेकेनाइज्ड एग्रीकल्चर के लिए युवा वैज्ञानिकों, टेक्नीशियन और युवा किसानों की जरूरत है। सभी कृषि प्रक्रियाएं तकनीक पर ही आधारित होंगी। वर्तमान परिदृश्य में नैनो टेक्नोलॉजी और ड्रोन तकनीक इसके उदाहरण हैं।
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