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लोक अदालत में 7646 मामले निपटाए

Sun, 24 Nov 2013 12:44 AM IST
कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से न्यायिक परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 7646 मामले निपटाए गए।
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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राकेश गर्ग ने न्यायिक परिसर में चल रही लोक अदालतों का दौरा किया।

जिला एवं सत्र न्यायधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ललित बत्रा उनके साथ रहे। अतिरिक्त जिला एंव सत्र न्यायधीश एमएम धोचक, एडीजे राजेन्द्र सिंह ढाडां, एडीजे रंजना अग्रवाल, एडीजे एके सिंघल, एडीजे, एडी दीवान, जज सुधीर परमार, सीजेएम सुमित गर्ग सहित अन्य जजों ने अपनी-अपनी कोर्टों में आयोजित लोक अदालतों में मामलों का निपटारा किया।

जस्टिस गर्ग ने कोर्ट परिसर में चल रही लोक अदालतों का भी निरीक्षण किया।

जस्टिस गर्ग ने कहा कि धन की बर्बादी रोकने और न्याय केे लिए सालों के इंजतार खत्म करने में लोक अदालतों की भूमिका निर्णायक सिद्ध हो रही हैं।

लोक अदालत में आपसी सहमति से वाहन दुर्घटना मुआवजा, केस से संबंधित मामले, मजदूरी विवाद, दीवानी मामले, जैसे कि किराया बैंक ऋण, राजस्व इत्यादि, बच्चों व पत्नी के लिए भरण पोषण आदि से संबंधित विवाद, राजीनामा योग्य फौजदारी मामले, वैवाहिक मामले, जमीन अधिग्रहण, मनरेगा, बाढ़ पीड़ित, बिजली, पानी बिल से संबंधित मामले, चेक बाउंस मामले, उपरोक्त के अलावा कोई भी अन्य विवाद जो अदालत में लंबित नहीं है, को भी लोक अदालत में लिया जा सकता है।
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जिला प्रशासन की तरफ से उपायुक्त निखिल गजराज, पुलिस अधीक्षक वाई पूर्ण कुमार ने जस्टिस गर्ग का पुष्प गुच्छ भेंट करके स्वागत किया। जिला एवं सत्र न्यायधीश ललित बत्रा सहित उपस्थित जजों ने भी जस्टिस गर्ग को पुष्प भेंट करके स्वागत किया।
इस अवसर पर नगराधीश सतबीर कुंडू, डीएसपी निर्मल सिंह, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह, डीएसपी नूपुर बिश्नोई, तहसीलदार सूरजमल, एआईपीआरओ बलराम शर्मा सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। जिला एवं सत्र न्यायधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ललित बत्रा ने लोक अदालत के फायदे संबंधी विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि लोक अदालत में फैसला होने पर सारी कोर्ट फीस वापस, दोनों पक्षों की रजामंदी से शांतिपूर्ण समझौता, लम्बा इंतजार तुरंत खत्म, चूंकि लोक अदालत में फैसला होने पर कोई भी अपील नहीं की जा सकती। इतना ही नहीं समान न्याय की सुविधा न किसी की जीत न किसी की हार, द्वेष भावना खत्म, प्रतिपक्षी से आपकी भाईचारा व दोस्ती का संबंध इत्यादि लोक अदालत के फायदे हैं।

क्रिमिनल अपील के 26 मामले निपटाए
एचएमए के 25, सिविल अपील के 10, क्रिमिनल अपील के 26, सिविल केसेज 419, पेटी केसेज 56, 125 सीआरपीसी 26, सीआरएल केसेज 60, 138 एनआई के 83, एक्सक्यूजन के 53, अन्य मामले 53, अनट्रेस/कैसलेशन के 82, सप्लाई ऑफ पावर/लाइट/वाटर के चार, पब्लिक कंसरवेंसी एंड सेनीटेशन का एक, हास्पिटल और डिस्पेंसरी इंश्योरेंस से संबंधित एक-एक, हाउसिंग एंड अस्टेट, बैंकिंग और फाइनेंस से संबंधित 12, पोस्टल, कोरियर, टेलीग्राफ, टेलीफोन सेवाओं से संबंधित 505 मामलों के साथ-साथ अन्य मामलों का निपटारा किया गया।
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एक करोड़ 66 लाख 77 हजार का हर्जाना
इसी प्रकार एमएसीटी के 83 मामले निपटाए गए, जिनमें एक करोड़ 66 लाख 77 हजार का हर्जाना दिया गया। समरी के 862 मामलों में 79 हजार 600 रुपये का जुर्माना किया गया। इसके साथ-साथ बैंक लोन से संबंधित मामलों में 33 हजार 483 रुपये की रिकवरी की गई। इसके अतिरिक्त पिहोवा में आयोजित लोक अदालत में अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिविजन विवेक यादव के मार्गदर्शन में कुल 2208 मामले निपटाए गए। समरी के मामलों में 99700 रुपये का जुर्माना किया गया इसके साथ-साथ अन्य मामलों में डिकरीड अमांउट 13 लाख 80 हजार 713 रुपए की गई।
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