माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम की ओर से शनिवार को सभी 20 वार्डों में प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटियों को दूर करने के लिए शिविर लगाए। ये शिविर रविवार को भी लगेंगे। बड़ी संख्या में लोग शिविरों में आपत्तियां लेकर पहुंचे। इन शिविरों में लापरवाही के चलते कई ऐसी त्रुटियां समाने आईं, जिसमें एक ही संपत्ति की दो-दो आईडी बनी थी, तो किसी की संपत्ति किसी दूसरे के नाम थी।
सभी शिविरों में 425 आपत्तियां आईं, जिनमें से 200 आपत्तियों को मौके पर ही निस्तारित कर दिया गया। शेष को नगर निगम कार्यालय भेज दिया गया है। जहां सत्यापन के बाद उनका निस्तारण कर दिया जाएगा। शिविरों में कई ऐसे लोग भी आए, जिनकी आपत्तियों का पिछले दो साल से निराकरण नहीं हो पा रहा था।
निगमायुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि नगर निगम कार्यालय में रोजाना प्रॉपर्टी आईडी में त्रुटियों को लेकर शिकायतें आ रही थीं। जिसे देखते हुए शहर के सभी 20 वार्डों में शिविर लगाकर लोगों को दिक्कतों को दूर किया जा रहा है। ये शिविर शनिवार की तरह रविवार को भी लगेंगे। जिस तरह के शिविरों में लोगों की भीड़ दिखी, उसे देखते हुए इनका समय अब सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक कर दिया गया है। सभी शिविरों में 425 आपत्तियां आई हैं, इनमें से 200 का तो मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया है। ऐसी आपत्तियां, जिनमें मौके पर जाकर सत्यापन की आवश्यकता है, उन्हें निगम के कर्मचारी शीघ्र ही दुरुस्त करा देंगे।
आईडी मेरी मगर फोटो पड़ोसी के मकान का
वसंत विहार ने जगदीश शर्मा ने आपत्ति दी कि उनकी भवन आईडी में उनके पड़ोसी की भवन का फोटो लगा हुआ है। न तो उसका मोबाइल नंबर दर्ज है और न ही क्षेत्रफल ही ठीक लिखा है। उसके भवन का क्षेत्रफल 106 गज लिखा है, जबकि वास्तव में 100 गज है। उसने चार आपत्तियां दर्ज कराई है। इन सभी को दर्ज कर लिया गया है।
न तो नाम दर्ज है, न ही क्षेत्रफल ठीक
रविकांत शर्मा ने बताया कि उनकी भवन आईडी पर भी उनके पड़ोसी के भवन का फोटो लगा हुआ है। ना तो उसकी आईडी में उसका नाम दर्ज हैं और न क्षेत्रफल ही ठीक से दर्ज किया गया है। यदि इसमें कुछ सही है तो सिर्फ मोबाइल फोन नंबर। एक लंबे समय से ये समस्या लेकर वह नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं।
श्रेणी बदलवाने को महीनों से लगा रहे चक्कर
शिकायत दर्ज कराने पहुंचे कर्मचंद ने बताया कि जब उन्होंने भवन खरीदा था तो इसमें दुकान थी। अब उन्होंने एक मंजिल और बनवाई है, दुकान को खत्म कर दिया है। कॉमर्शियल को आवासीय श्रेणी में कराने के लिए वह कई महीनों से नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। आज फिर शिकायत लेकर आए हैं, आज उम्मीद है कि काम हो जाएगा।
दोगुना कर दिया विकास शुल्क
शिकायतकर्ता दर्शन कुमार ने बताया कि उनकी प्रॉपर्टी आईडी में न तो क्षेत्रफल सही है और न ही नाम। साथ ही विकास शुल्क भी गलत लगा हुआ है। पहले एक आईडी थी तो जो विकास शुल्क आता था, अब दो आईडी हो गई तो दोनों उतना उतना ही विकास शुल्क लगा दिया गया है, जिससे एक ही संपत्ति का दोगुना विकास शुल्क देना पड़ रहा है।