किसानों को जानकारी देते डॉ. दलीप गोसाई। स्वयं
करनाल। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के झंडूत्ता ब्लॉक से आए सात प्रगतिशील किसानों के एक दल ने प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी लेने के लिए करनाल का दौरा किया। एनडीआरआई के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दलीप गोसाईं ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी बनावट प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग दो लाख किसान परिवार करीब 38,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आंशिक या पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।
हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है। मक्का के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम और कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम एमएसपी तय किया गया है। देशी पशुधन के महत्व पर बल देते हुए डॉ. गोसाईं ने किसानों को साहीवाल, गिर व राठी नस्ल की गायें पालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन नस्लों का गोबर और गोमूत्र प्राकृतिक खेती की आधारशिला हैं।
किसानों के दल ने तरावड़ी स्थित लगभग 500 पशुओं वाले एक प्रगतिशील डेयरी फार्म का भी भ्रमण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुरुक्षेत्र में गुरुकुल आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल का भी अध्ययन किया। गांव पधाना में किसानों को डॉ. गोसाईं ने बताया कि धनिया, टमाटर और अन्य सब्जी फसलें प्राकृतिक खेती के तहत सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। डॉ. सुदर्शन चंदेल (बीटीएम), करतार सिंह, अविनाश, नंद लाल चौहान, जगत पाल, बलदेव शर्मा व रामदत्त उपस्थित रहे।
किसानों को जानकारी देते डॉ. दलीप गोसाई। स्वयं