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चकबंदी की जांच के लिए एक बार फिर सड़कों पर उतरे ग्रामीण

Tue, 17 Sep 2013 10:17 PM IST
घरौंडा
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चकबंदी के कारण अपनी जमीन गंवाने वाले चार गांवों के किसानों ने चकबंदी की जांच कराने की मांग के लिए शहर में एक बार फिर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियाें ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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बाद में ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय में पहुुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम कानूनगो को ज्ञापन सौंपा। सामाजिक संस्था आईएसी के सदस्य जेपी शेखपुरा मुख्य रूप से मौजूद रहे और उन्होंने अन्य गांवों के लोगों से आह्वान किया कि चकबंदी का दंश झेल रहे लोगों का सहयोग करें।

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के मामले में वे राजनेताओं का दरवाजा भी खटखटाएंगे है, अगर राजनीतिक पार्टियों के नेता उनकी कोई सुनवाई नहीं करते तो लोकसभा व विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। मंगलवार को गांव लालुपुरा, कालरम, अमृतपुर कलां व अराईपूरा के ग्रामीण अपने बीवी बच्चों के साथ नई अनाज मंडी स्थित आईएसी कार्यालय में एकत्रित हुए।
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ग्रामीण प्रदीप कुमार, नरेंद्र कुमार, रामकुमार, जगपाल, सतीश कुमार सहित अन्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन के अधिकारियों ने भूमाफिया लोगाें से मिलीभगत करके फसलें उजाड़कर उन्हें भूमिहीन कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे डीसी कार्यालय पर अर्धनग्न प्रदर्शन कर अपनी मांगाें का ज्ञापन उन्हें सौंप चुके हैं लेकिन प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

अगर जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दिल्ली के जंतर मंतर पर अपने परिवार के साथ धरने पर बैठे जाएंगे। प्रशासन ने उन्हीं अधिकारियों को चकबंदी की जांच का जिम्मा सौंप दिया, जिन्हाेंने भू माफियाओं से मिलकर चकबंदी की थी। चकबंदी करने वाले कानूनगो व पटवारियाें के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और चकबंदी की जांच सीबीआई से कराई जाए।

ग्रामीणाें ने नई अनाज मंडी से अपना प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शन में छोटे-छोटे बच्चों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन की अगुवाई की और महिलाओं ने हाथों में लाठी डंडे लेकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शन नई अनाज मंडी रोड, मंडी मनीराम, तकिया मार्केट, मेन बाजार, दिल्ली चुंगी से होता हुआ तहसील कार्यालय पहुंचा। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने चेताया कि एक सप्ताह के अंदर चकबंदी की जांच नहीं करवाई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो एक महा आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

इसी साल जून में हुई थी चकबंदी
इस वर्ष जून में प्रशासन ने न्यायालय के आदेश पर गांव कैरवाली, अमृतपुर कलां व अमृतपुर खुर्द में नई चकबंदी की थी। इस चकबंदी में प्रशासन ने ग्रामीणों की जमीन से फसलें उजाड़कर उन्हें भूमि से बेदखल कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि उनके पूर्वजों ने 1939-40 में कैरवाली, अमृतपुर कलां व अमृतपुर खुर्द में कृषि भूमि खरीदी थी। इस जमीन की 1965-66 में चकबंदी हुई थी।

उस समय सभी किसानों को उनका पूरा-पूरा रकबा दिया गया। कुछ समय बाद प्रभावशाली लोगों की नजर इस जमीन पर पड़ी और नई चकबंदी तैयार करवाई गई। किसानों ने आरोप लगाया कि अदालत से स्टे के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियोें ने जबरदस्ती चकबंदी कर दूसरों के नाम कर दी।

पूरे परिवार का गुजारा इस भूमि से काश्त करके चलता था, परंतु अब परिवार के पास पेट भरने का कोई साधन नहीं है। जमीन चकबंदी मामले में एक पीड़ित परिवार के 50 सदस्यों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार भी लगाई हुई है। उन्होंने राष्ट्रपति को लिखा है चाहे तो उनकी समस्या का हल करे या उन्हें इच्छा मृत्यु करने की अनुमति दे।
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