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बैंक में हस्ताक्षर करवा कर दिया गोलमाल

Sun, 15 Sep 2013 12:16 AM IST
कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र में 14 साल में जरनल बाडी की महज दो बैठकें और उनमें भी एक बैठक की कार्रवाई फर्जी, ये आरोप जिला के एकमात्र शहरी सहकारी बैंक पर हैं। बैंक के सीईओ पर आरोप लगाते हुए बैंक के सदस्यों ने शनिवार को बुलाई गई बैठक में जमकर हंगामा मचाया। इस हंगामे के दौरान सीईओ रुपिंद्र सिंह बैंक की उपलब्धियां गिनाते रहे, लेकिन गुस्साएं मेंबरों ने उनकी सुनने की बजाए कई सवाल उठाए। मेंबर गुरदेव सिंह चट्ठा ने कहा कि उनके सहित दर्जनों मेंबरों ने 2007 की फर्जी कार्रवाई की लिखित शिकायत और हस्ताक्षरों की प्रतियां पंचकूला रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटी हरियाणा को भेजी है। इस शिकायत में मेंबरों के हस्ताक्षरों का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया गया है।
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गुस्साए सदस्यों ने कहा कि सितंबर 2007 की बैठक में उन मेंबरों को शामिल बताया जा रहा है, जो इस बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे। इनका आरोप है कि जरनल बाडी की 25 सितंबर 2007 को हुई बैठक के कार्रवाई रजिस्टर में जिन सदस्यों को हस्ताक्षर दिखाए जा रहे हैं, वे हस्ताक्षर बैठक के नहीं, बल्कि उस समय के हैं, जब वे बैंक में अपने निजी कार्य करने आए थे।

इन सदस्यों का आरोप है कि नियमानुसार पिछले 14 वर्षों में हर साल जरनल बाडी की कम से कम एक बैठक होनी लाजिमी थी। इस लिहाज से 2014 तक 14 बैठकें होनी चाहिए थीं, लेकिन इस दौरान वर्ष 2002 के बाद दूसरी बैठक सितंबर 2007 में हुई थी और तीसरी बैठक अब 14 सितंबर को। इस बैठक की सूचना मेंबरों को नहीं दी गई।
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कोआपरेटिव बैंक में 1999 से आज तक बैंक का चेयरमैन नहीं चुना जा सका, क्योंकि चेयरमैन पद के चुनाव का मामला कोर्ट विचाराधीन है। बैंक के निरीक्षक ऋषिराम शर्मा का कहना है कि बैठक बुलाने का अधिकार चेयरमैन के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार को है।

बैंक संबंधित योजनाओं, सुधार और खामियों की समीक्षा के लिए जरनल बाडी की बैठक साल में कम से कम एक बार कराने का नियम है। फिलहाल लंबे समय से इस नियम की अवहेलना हो रही है, लिहाजा जिला के इस एकमात्र बैंक का कार्य सुचारु रूप से नहीं चल रहा है।

थानेसर नगर परिषद के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राज गौड़, पृथ्वी नाथ तुर्क सहित कांग्रेस से जुड़े कई लोगों ने आज यह मुद्दा बैठक के दौरान उठाया। गौड़ का कहना है कि 2007 में हुई बैठक और इसमें लिए गए निर्णयों को रद किया जाए, इसके अलावा चुनाव के लिए 2007 से पहले जो नियम थे, उन्हें ही लागू किया जाए।
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