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बढ़ सकते हैं फल सब्जियों के दाम

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करनाल। करनाल सहित हरियाणा के कई जिलों में सब्जी विक्रेता कोरोना महामारी के संवाहक बने हैं, इनके माध्यम से कई घरों तक कोरोना पहुंचा है। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने यूपी, जम्मू कश्मीर सहित देश के किसी भी राज्य से किसी भी तरह की सब्जी व फलों के करनाल जिले की सीमा में आने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। हरियाणा राज्य के भी पानीपत, झज्जर, बहादुरगढ़ आदि किसी भी रेड जोन जनपद से भी फल व सब्जियों के लाने पर रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध के कारण जिन फल आढ़तियों का माल रास्ते में हैं, उनकी चिंताएं काफी बढ़ गई हैं क्योंकि उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इधर दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि अब सब्जियों व फलों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है।
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सबसे बड़ी समस्या यह है कि हरियाणा राज्य में आम लोगों की पसंद बन चुके फलों में से कोई भी फल उत्पादित नहीं होता है, इसमें जैसे सेव, संतरा, पपीता, अंगूर, आम, खरबूजा, चीकू आदि कई फल शामिल हैं। इसके अलावा मटर, आलू जैसी कई सब्जियां भी ऐसी हैं, जिन्हें बाहरी राज्यों से ही मंगाया जाता है। आलू हरियाणा में उत्पादित होता है, लेकिन सिर्फ कच्चा, जो सिर्फ खुदाई के बाद बिक जाता है, कोल्ड स्टोरेज में भं डारित यानी पक्का आलू यूपी के आगरा या फिर पंजाब आदि से ही मंगाया जाता है। यही स्थिति प्याज की भी है, जो नासिक, इंदौर आदि से मंगाया जाता है। यदि अब बाहर से फल व सब्जियां नहीं आएंगी तो उपलब्ध स्टाक खत्म होने के बाद इनके दामों में वृद्धि हो सकती है। कल से लगे प्रतिबंध के बाद आज ही सब्जियों के दामों में उछाल आना शुरू हो गया है।
उपायुक्त से मिलकर रोक हटाने की मांग पर सहमत नहीं प्रशासन
करनाल। हरियाणा राज्य से बाहरी राज्यों से फलों और सब्जियों को लाने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाए जाने के बाद करनाल फल एवं सब्जी आढ़ती एसोसिएशन चिंतित हो उठी है, क्योंकि उनका पूरा कारोबार ही प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। यही कारण है कि एसोसिएशन के पदाधिकारी किशन सचदेवा, नरेंद्र कुमार, जितेंद्र मलिक, विजय सहगल, अवतार सिंह तारी, डिंपी ढींगरा, प्रमोद बजाज, कमल बिट्टू, बारू राम आदि ने शनिवार को उपायुक्त से मिलकर अपनी समस्या बताई।
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एसोसिएशन के वरिष्ठ नेता किशन सचदेवा ने बताया कि उपायुक्त को ज्ञापन देकर मांग की कि देश के किसी भी प्रांत से करनाल मंडी में फलों व सब्जियों की आवक को प्रतिबंधित न किया जाए। क्योंकि सब्जी व फल हर घर की मांग है, यह आवश्यक वस्तु हैं, जिसका अभाव हो जाएगा। इनके मूल्य नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे। किसी भी प्रदेश से आई सब्जी या फल में कोरोना का संक्रमण नहीं होता है, यह तो कृषि उत्पादन है जो प्राकृतिक है। भले ही पास होल्डर्स की संख्या बढ़ा दी जाए। ताकि किसानों की स्थानीय उपज की बिक्री हो सके। यदि किसी विशेष शहर या जिले की बात को तो डीलर को सूचित कर दिया जाए, वहां से माल नहीं मंगाएंगे। छोटे मोटे मामलों पर डीलरों के लाइसेंस निरस्त करने की धमकी देने वाला कानून भी रद् किया जाए। मंडियों में डिलीवरी में अड़चन न डाली जाए। जिले की घरौड़ा, निसिंग, कुंजपुरा, जुंडला, इंद्री, तरावड़ी आजि मंडियों में माल ले जाने की छूट दी जाए। भले ही उसके लिए कुछ नियम बना दिए। आढ़तियों ने बताया कि मांग पत्र देने के बावजूद उपायुक्त ने फिलहाल को कोई राहत नहीं दी है।
-यह तो जिला प्रशासन का अदूरदर्शिता भरा निर्णय है, हरियाणा में कोई फल पैदा नहीं होता है, अधिकांश सब्जियां भी बाहर से ही आती है, जो नहीं आएंगी तो आखिर लोगों की मांग पूरी कैसे होगी। इनके दामों में भारी वृद्धि होगी तो आखिर इसका बोझ जनता पर ही तो पड़ेगा। प्रशासन को इसका हल निकालना ही चाहिए।
-किशन सचदेवा, वरिष्ठ नेता-करनाल सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन।
-जिला प्रशासन के बाहर से माल नहीं उतरने देने के निर्णय की जानकारी तो आज ही हुई है, मेरा तो करीब लाखों रुपये का माल रास्ते में हैं, ऐसे की कई अन्य आढ़तियों का करोड़ों का माल रास्ते में हैं, कई ने एडवांस दे रखा है, उनका धन तो फंस जाएगा। कम से कम जिला प्रशासन को इसके लिए सप्ताहभर का समय तो देना ही चाहिए। माल जम्मू कश्मीर व अन्य राज्यों से चल चुका है, वह उतरेगा नहीं तो सड़ जाएगा।
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-राजेंद्र सिंह राणा, संचालक फ्रूट कंपनी सब्जी मंडी करनाल।
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