संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के लेक्चर हॉल में शनिवार को क्लिविरो कॉन- 2026 सेमिनार आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने बदलते संक्रमण पैटर्न और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों को रोजमर्रा की चिकित्सा सेवाओं में शामिल करने पर चर्चा की। मौसम बदलते ही बढ़ने वाले वायरल संक्रमण, जुकाम और कैंसर से बचाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चिकित्सकों ने विचार रखे। कहा कि सही जांच और समय पर टीकाकरण से ही वायरल बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
सेमिनार में मेडिकल कॉलेज से लेकर रोहतक पीजीआई व दिल्ली एम्स सहित कई अस्पतालों से आए वरिष्ठ विशेषज्ञों ने बतौर वक्ता के रूप में सही सैंपल, सही समय पर जांच और गाइडलाइन आधारित उपचार से मरीजों की स्थिति को जल्दी नियंत्रित किया जाने की बात पर जोर दिया। कहा गया कि डॉक्टरों को लक्षणों के आधार पर नहीं बल्कि साक्ष्य आधारित जांच और आधुनिक लैब तकनीकों के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। इससे अनावश्यक दवाओं का उपयोग कम होगा और उपचार अधिक प्रभावी बन सकेगा।
डॉ. ऋचा कंसल ने ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की जांच और वैक्सीनेशन पर जानकारी देते हुए कहा कि सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह रोके जा सकने वाले कैंसरों में से एक है, यदि नियमित स्क्रीनिंग और समय पर टीकाकरण किया जाए।
हिमाचल प्रदेश रैबीज नियंत्रण विषय पर पद्मश्री सम्मानित और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व महामारी विशेषज्ञ डॉ. ओमेश भारती ने विश्व स्वास्थ्य संगठन दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय नीति के अनुसार बताया कि पशु के काटने के बाद तुरंत उपचार जीवन रक्षक सिद्ध होता है।
कार्यक्रम में पं. दीनदयाल उपाध्याय स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय करनाल के रजिस्ट्रार डॉ. अरुण कुमार पांडे बतौर मुख्य अतिथि, शैक्षणिक कार्य की डीन डॉ. ज्योति सेठी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा अग्रवाल ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार रहे। आयोजन सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपिंद्र सिंह ने किया।
सही नमूना जांच की कुंजी
डॉ. प्रेरणा अग्रवाल ने वायरस डिटेक्शन के लिए सैंपल के सही कलेक्शन और ट्रांसपोर्ट की प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि गलत तरीके से लिया गया नमूना कई बार रिपोर्ट को प्रभावित कर देता है। सही नमूना जांच की कुंजी है।
- अधूरा टीकाकरण खसरा बीमारी की वापसी का कारण
बच्चों में दोबारा बढ़ते खसरा और मम्प्स के मामलों पर चिंता जताते हुए स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान चंडीगढ़ के डॉ. भवनीत भारती ने कहा कि अधूरा टीकाकरण इन बीमारियों की वापसी का मुख्य कारण है। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर टीकाकरण अभियान मजबूत करने पर जोर दिया। नई दिल्ली के एम्स अस्पताल से माइक्रो-बायॉलोजी विभाग के इंचार्ज डॉ. आशीष चौधरी, रोहतक के पॉजिट्रोन अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. वीके कट्याल ने भी जानकारी दी।