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सरकार का एनडीसी पोर्टल हैक, सीएम सिटी में जारी कर दी सैकड़ो फर्जी संपत्ति आईडी

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करनाल। करनाल में लंबे समय से जब भी किसी अवैध कालोनी में भवनों को तोड़ा जाता है, तो सबसे पहले अवैख कालोनियों में घर बनाने वाले रजिस्ट्री ही दिखाते हैं। इसी रजिस्ट्री के दम पर उन्हें बिजली, घरेलू गैस का कनेक्शन मिल जाता है। आज यह खेल तो खुल गया कि एनडीसी पोर्टल को हैक करके फर्जी संपत्ति आईडी तैयार की जा रही थीं लेकिन सवाल यह है कि इतने लंबे समय से यह खेल चल रहा था, फिर राजस्व महकमें से लेकर नगर निगम तक किसी को इसकी भनक क्यों नहीं लग सकी। अब सरकार को कितने राजस्व का चूना लगाया जा चुका है। जो लोग इन संपत्ति आईडी पर अपनी जमीनों की रजिस्ट्री करा चुके हैं, अब उनका क्या होगा ? यह सवाल भी बड़ा है कि क्या पुलिस सरकारी पोर्टल को हैक करने वाले साइबर अपराधी की तलाश कर पाएगी।
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हैकर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई। पुलिस ने जांच भी शुरू कर दी। पुलिस की जांच कितनी लंबी चलेगी, यह तो कोई नहीं जानता लेकिन इस खुलासे के बाद उन दो सौ से अधिक मकान मालिकों का क्या होगा जो इन्हीं फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी के आधार पर रजिस्ट्री करा चुके हैं। क्योंकि प्रापर्टी डीलर भी इन्हीं रजिस्ट्री के आधार पर जमीन बेच रहे हैं। कहीं इसके पीछे प्रापर्टी डीलर, राजस्व व नगर निगम के अधिकारियों की कोई साठगाठ तो नहीं है। इन सभी सवालों का जवाब देना बाकी है। हालांकि रजिस्ट्री तो हुई है, सरकार को राजस्व भी मिला है। लेकिन वह रजिस्ट्री ही अवैध हो गई तो जमीन आखिर प्रापर्टी डीलर की होगी या फिर खरीदने वालों की। यही चिंता जमीन खरीदने वालों को सताने लगी है।
अफसरों के फोन नंबरों से डीकोड कर दिया पोर्टल
-हरियाणा सरकार ने 21 नवंबर-2020 अस्थायी संपत्ति आईडी बनाने से पहले संबंधित नगर निगम अधिकारियों से अनुमोदन अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद निगम अधिकारी भी इस प्रक्रिया में सीधे शामिल हो गए। उनके मोबाइल नंबर पंजीकृत किए गए। उन पर ओटीपी आने के बाद ही उनके अनुमोदन से ही अस्थायी संपत्ति आईडी स्वीकृत की जा सकती थी। ओटीपी डालने के बाद ही एनडीसी पोर्टल पर लॉगिन किया जा सकता था। वह सिर्फ सप्ताहभर के लिए, अगले सप्ताह फिर से ओटीपी डालकर लॉगिन होता था लेकिन इसके बावजूद जसबीर सिंह सहायक, नगर निगम के 9999999990 मोबाइल नंबर से आईडी जारी होती रही। बताया गया कि यह मोबाइल नंबर जसबीर सिंह का है ही नहीं। हैकर्स ने इस नंबर से एनडीसी को डीकोड कर आईडी जारी करनी शुरू कर दी।
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फर्जी संपत्ति आईडी जारी होने के शक के बाद 29 जनवरी को ही जांच ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम को सौंपी थी। उन्होंने इसकी शनिवार को विस्तृत रिपोर्ट दी थी, इसके बाद ईओ निशा शर्मा को धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। एफआईआर दर्ज करा दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। नगर निगम भी और एहतियात बरत रहा है। जो फर्जी आईडी जारी की गई हैं, किन लोगों ने जारी कराई हैं इन सभी बिंदुओं को लेकर निगम स्तर पर दिखवाया जा रहा है।
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-विक्रम, कमिश्नर नगर निगम करनाल
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