करनाल। वक्त के साथ-साथ जिले की आबादी 30 सालों में डेढ़ गुणा तक बढ़ गई लेकिन रोडवेज की बसों का बेड़ा आबादी के साथ बढ़ने की बजाय सिमटता जा रहा है। हालात यह है कि यात्रियों को बड़े मार्गों के अलावा स्थानीय मार्गों पर भी परिवहन सुविधा की कमी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने करनाल में हरियाणा रोडवेज बस अड्डे तो दो बना दिए लेकिन नई बस एक भी नहीं दी। करनाल डिपो में 124 बसें हैं, इनमें से 120 बसें ही ऑन रूट रहती हैं। जबकि वर्तमान में आबादी के हिसाब से 350 से ज्यादा बसें होनी चाहिए। 1990 में 10 लाख की आबादी पर जिले में 240 बसें थी, यानी तब करीब चार हजार आबादी पर एक बस। अब जनसंख्या बढ़कर साढ़े 16 लाख तक पहुंच गई है। ऐसे में प्रति बस पर आबादी की निर्भरता का अंतराल भी बढ़कर साढ़े 13 हजार हो गया है। ऐसे में इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफर कितना सुहाना होगा। बसों की कमी के कारण करनाल डिपो से आठ इंटर स्टेट और 20 से ज्यादा स्थानीय मार्गों पर बस सर्विस बंद है।
प्रदेश की स्थिति की बात करें तो हरियाणा में आबादी के हिसाब से 10 हजार बसों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में रोडवेज के बेड़े में 3380 बसें ही हैं, इनमें से भी 2916 बसें ही मार्गों पर दौड़ रही हैं।
52 सीटों की बस में सफर करती हैं 110 सवारियां
नियमों के अनुसार एक रोडवेज बस में 52 सवारियां बैठाई जा सकती हैं लेकिन बसों की कमी के कारण एक बस में 110 सवारियां बस के अंदर और बाहर लटक कर सफर करती हैं। रोडवेज परिचालकों ने बताया कि सुबह स्कूल व कॉलेज के समय और दोपहर बाद छुट्टी के समय कुछ ऐसे ही हालात रहते हैं। ऐसे में रास्ते में अन्य सवारियों को बस में चढ़ाना और मुश्किल हो जाता है।
नई एक नहीं आई और 39 बसें तीन साल में हुई कंडम
2019 में करनाल डिपो में 163 बसें चल रही थी। वर्तमान में 124 बसें चल रही हैं यानी 39 बसें तीन सालों में कंडम हुई हैं। 2020 में भी बसों की संख्या 158 थी। हालात यह भी हैं कि 2018 के बाद करनाल डिपो में एक भी नई बस शामिल नहीं हुई। ऐसे में बसों की संख्या घटने से स्थिति और बिगड़ती जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, दो माह तक 11 बसें और कंडम हो जाएंगी।
दिल्ली और चंडीगढ़ से बस लेने को मजबूर
बसों की कमी के कारण करनाल से पंजाब के होशियारपुर, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला, भरठी और बैजनाथ, जम्मू व जयपुर की सीधी बस सेवा बंद है। ऐसे में इन जगहों पर जाने के लिए लोगों को दिल्ली, अंबाला या चंडीगढ़ से बस लेनी पड़ती है। सरकार की ओर से करनाल में बस अड्डे तो दो बना दिए लेकिन बसों की कमी अभी तक पूरी नहीं हो पाई।
वर्जन- फोटो-- 72 नंबर है।
बसों की कमी के कारण कई रूट प्रभावित हैं। नई बसें देने के लिए सरकार को लिखा भी हुआ है। उम्मीद है कि बसें मिल जाएं। फिलहाल 124 बसों से ही बेहतर सुविधा देने का प्रयास कर रहे हैं। बसों की जरूरत दो गुना से ज्यादा है। - कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक, रोडवेज करनाल डिपो