करनाल। त्योहारों के बाद शहर की हवा अब भी जहरीली बनी हुई है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स भले ही 269 से घटकर 193 पर आ गया हो लेकिन यह अब भी खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण विभाग की तमाम हिदायतों के बावजूद शहर की सड़कों पर उड़ती धूल, खुले में जलता कूड़ा और फैक्ट्रियों से निकलता काला धुआं हवा को लगातार दूषित कर रहा है।
अधिकारियों की निगरानी कागजों तक सिमट कर रह गई है। एक सप्ताह में दिवाली के दौरान और उसके बाद प्रदूषण ने सबसे खराब स्तर छुआ था। उस दौरान करनाल का एक्यूआई 269 के पार चला गया था, जो कि बहुत खराब श्रेणी में आता है। हालांकि अब एक्यूआई में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन 193 पर होने के बावजूद यह सांस और फेफड़ों के मरीजों के लिए अब भी खतरनाक माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में सांस, दमा और हृदय रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लोगों को सुबह-शाम खुली हवा में टहलने से बचना चाहिए और घर से निकलते समय एन-95 मास्क का उपयोग करना चाहिए। बता दें कि शहर में प्रदूषण रोकने के लिए ग्रेप-2 लागू है, लेकिन इसके बावजूद न तो सड़कों पर नियमित पानी छिड़काव हो रहा है, न ही खुले में कूड़ा जलाने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। पर्यावरण विभाग की सख्त हिदायतों के बावजूद प्रशासन की लापरवाही ने शहर की हवा को लगातार दूषित बनाए रखा है।
धूल, धुआं और कचरे की आग बना समस्या
शहर की सड़कों पर जगह-जगह धूल उड़ रही है, निर्माण कार्यों और सड़क किनारे पड़े मलबे को ढकने के कोई इंतजाम नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा प्रबंधन की लापरवाही के कारण जगह-जगह लोग कचरा जलाते नजर आते हैं। इससे निकलने वाला धुआं शहर के वातावरण को और जहरीला बना रहा है। फैक्ट्रियों और डीजल जनरेटरों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई बार चेतावनी जारी की, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
41 विभागों को मिले निर्देश, लेकिन नहीं हो रहा पालन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए 41 विभागों के अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं, जिनमें सड़क पर पानी का छिड़काव, निर्माण कार्य स्थलों को ढकना, कचरा न जलाना और वाहनों की जांच जैसे कदम शामिल हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। कई जगहों पर सड़क किनारे मिट्टी और सीमेंट के ढेर खुले में पड़े हैं, जिनसे धूल उड़कर हवा में मिल रही है।