करनाल। शादी का सीजन में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका खोजा है। आजकल लोग घर-घर जाकर शादी का कार्ड देने की बजाए व्हाट्सएप पर ही कार्ड भेज देते हैं। अगर आपके पास भी ऐसा ही कार्ड आया है, फाइल के पीछे डॉट एपीके लिखा है तो इस पर क्लिक करने से आपका मोबाइल हैक हो सकता है।
करनाल जिले में इस साल 52 मामले ऐसे आ चुके हैं। साइबर अपराधियों ने इस प्रकार के कार्ड और अन्य फाइल भेजकर करोड़ों रुपये की ठगी की है। बचने के लिए व्हाट्सएप पर आने वाले वास्तविक कार्ड और डॉट एपीके कार्ड में अंतर के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। शादी कार्ड के अलावा फसल मुआवजा संबंधी फाइल और ट्रैफिक चालान आदि के नाम की फाइल भेजकर भी खाते खाली किए जा रहे हैं।
झारखंड से चलता है ठगी का खेल
डॉट एपीके से संबंधित ठगी की घटनाओं के तार झारखंड के जामताड़ा, देवघर और चिरकूंडा नाम के गांवों से जुड़ रहे हैं। यह तीनों गांव पहाड़ी क्षेत्र में स्थित हैं। वर्ष 2024 में करनाल साइबर पुलिस थाना में दर्ज एक केस में इन गांवों से आठ लोगों को गिरफ्तार की गई थी। इस साल भी करनाल पुलिस डॉट एपीके फाइल से हुई ठगी के मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
मोबाइल से सभी जानकारी निकाल लेते हैंव्हाट्सएप पर आई डॉट एपीके फाइल पर क्लिक करते ही आपका मोबाइल हैक हो जाता है। साइबर अपराधी के पास फोन का पूरा कंट्रोल चला जाता है। जैसे ही हम फोन से नेटबैंकिंग, गूगल पे या अन्य बैंकिंग संबंधी कोई भी प्रक्रिया करते हैं तो ठगों को पासवर्ड पता चल जाता है। इसके बाद वह खाता खाली कर देते हैं। इसके अलावा पूरा कंट्रोल लेकर व्हाट्सएप के माध्यम से शादी कार्ड की डॉट एपीके फाइल हमारे फोन की कांटेक्ट लिस्ट में सभी नंबरों के पास भेज दी जाती है। जो भी उसे खोलता है ठगी का शिकार हो जाता है।
ऐसे करें ठगी वाली फाइल की पहचानशादी का कार्ड : वहाट्सएप पर भेजा शादी का कार्ड पीडीएफ, जेपीजी या पीएनजी फॉर्मेट में होगा। इन फॉर्मेट में कार्ड आया है तो यह कार्ड सही है। जिस कार्ड या फाइल की एक्सटेंशन यानि उसके पीछे डॉट एपीके (.apk) लिखा हुआ है तो इसे क्लिक नहीं करें।
यातायात पुलिस चालान : यातायात पुलिस चालान कभी व्हाट्सएप पर नहीं भेजा जाता। ऐसे चालान आरसी में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से भेजे जाते हैं। अगर यह सूचना व्हाट्सएप पर आई है तो यह साइबर ठग की ओर से भेजी गई है। इस बारे में पुलिस को जानकारी दें।
(जैसा कि संजय कुमार, थाना प्रभारी, साइबर थाना करनाल ने बताया)
ये केस आए सामने
केस-1
फाइल पर क्लिक करते ही 10 लाख की ठगी
असंध के मुनीष ने बताया कि उनके पास डॉट एपीके फाइल आई। उनके फाइल डाउनलोड करने के कुछ समय के बाद बैंक खाते से 10 लाख रुपये कट गए। जब बैंक में गए तो पता लगा कि साइबर ठग ने यह राशि ट्रांसफर कर ली है। जब उन्हें पता लगा कि उनके साथ यह ठगी हुई है तो साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी।
केस-2
चालान की राशि देखनी चाही तो कटे सात लाख
सेक्टर-8 निवासी एक व्यक्ति के पास व्हाट्सएप पर आरटीए चालान के नाम से डॉट एपीके फाइल आई। उन्होंने खोलकर देखना चाहा तो कुछ दिखाई नहीं दिया। उन्होंने अपने दोस्त को चालान चेक करने के लिए यह फाइल भेज दी तो दोस्त के खाते से सात लाख रुपये की राशि कट गई। बैंक जाकर अन्य ट्रांजेक्शन बंद करवाई और साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी।
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