जितेंद्र नरवाल
करनाल। कर्ण कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स यानी मुगल कैनाल का फेज-2 नगर निगम और वन विभाग के बीच जमीन के विवाद के कारण अटक गया है। अरबों रुपये का प्रोजेक्ट मुगल कैनाल वाले नाले की जमीन पर बनना है। नगर निगम और वन विभाग दोनों जमीन पर अधिकार जता रहे हैं। वन विभाग ने एनओसी देने से इन्कार कर दिया है।
नगर निगम शहर एरिया में आने वाले नाले की इस जमीन पर राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अधिकार बता रहा है। वन विभाग इसे नोटिफाइड एरिया का हवाला देकर अपनी संपत्ति बता रहा है। वन विभाग ने जमीन पर करीब 2500 पेड़-पौधे लगा दिए हैं। जमीन की निशानदेही और इसे विकसित करने के लिए वन विभाग से मंजूरी मांगी गई थी। विभाग ने मंजूरी नहीं दी। नगर निगम की ओर से मांगी गई एनओसी पर वन विभाग ने जवाब दिया कि जमीन वन विभाग की है। विभाग इस पर पौधरोपण कर चुका है।
मामला दोनों विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों तक पहुंच गया है। पिछले कई दिनों से इस मसले पर चंडीगढ़ में बैठकें चल रही हैं। मेयर रेणू बाला गुप्ता ने वीरवार को निगम अधिकारियों को इस जमीन की निशानदेही करने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। मेयर का कहना है कि अगर इस जमीन पर किसी का कब्जा है तो उसे भी हटाया जाए। बताया जा रहा है कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जमीन नगर निगम के अधीन दिखाई जा रही है जबकि इस जमीन को 1972 में नोटिफाई वन विभाग को किया गया था। वन विभाग ने करीब 10 किलोमीटर में पौधे लगा दिए।
नाले के दोनों ओर की है जमीन
अटल पार्क से लेकर मेला राम स्कूल के पिछले हिस्से तक, मुगल कैनाल यानी कर्ण कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स वाली जमीन को निगम ने वर्ष 1993 में विकसित किया था। दो फेज में जीटी रोड तक नाले को स्लैब से कवर किया गया है लेकिन इसके दोनों ओर की जमीन खाली है। निगम इस जमीन को भी विकसित करने के प्रयास में है। यहां वन विभाग पहले ही पौधरोपण कर चुका है।
जमीन के बदले जमीन देने पर चर्चा
नियमानुसार वन विभाग को जमीन के बदले जमीन देने और लगाए गए पेड़-पौधों की जगह अन्य स्थान पर पौधरोपण या उनकी लागत देने पर बात हो रही है। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की पंचकूला मुख्यालय में लगातार बैठक चल रही हैं। शहर के नेताओं का भी कर्ण कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को विकसित करने का मन है। वे भी पैरवी कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मामले का फैसला नगर निगम के हक में आ सकता है। निगम को वन विभाग को जमीन के बदले जमीन और पौधों के बदले राजस्व जमा करवाना पड़ सकता है।
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मामले पर शहरी स्थानीय निकाय और वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिवों की बैठकें हो रही हैं। हाई लेवल कमेटी के पास प्रकरण लंबित हैं। हमने सिफारिश की है कि ये जमीन निगम को दी जाए। उम्मीद है कि फैसला जनहित में निगम के पक्ष में जल्द होगा। इसके जमीन को विकसित करने का काम किया जाएगा। -रेणु बाला गुप्ता, मेयर, करनाल