करनाल। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की ओर से आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में प्राकृतिक खेती आधारित पोषण वाटिका विषय पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 85 पुरुष व महिला किसानों ने भाग लिया। इसमें प्राकृतिक खेती, वर्मी-कम्पोस्ट, मजदूरों के स्वास्थ्य संरक्षण तथा महिलाओं के लिए पोषण वाटिका के महत्व पर जोर दिया गया।
केंद्र अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता घट रही है और प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने किसानों को कम लागत और टिकाऊ खेती पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती आधारित पोषण वाटिका न केवल परिवार को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराती है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन निदेशक डॉ. धीर सिंह ने किया।
हरियाणा विज्ञान मंच के प्रमुख विजय सेतिया ने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाने के साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहें। उन्होंने कहा कि रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी, जल स्रोत और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाने से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता बनी रहती है और फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। इससे किसानों, खेत मजदूरों और उपभोक्ताओं को गंभीर बीमारियों के जोखिम से बचाव मिलता है।
गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. सोनिया ने महिलाओं एवं किसानों को पोषण आधारित किचन गार्डनिंग (पोषण वाटिका) के महत्व की जानकारी दी। कृषि प्रौद्योगिकी एवं सूचना केंद्र के प्रभारी डॉ. बीएस मीना ने प्रतिभागियों को आगामी डेयरी मेला एवं एग्री-एक्सपो 2026 की जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. राजेश कुमार मीना, अश्विनी कुमार, डॉ. उत्तम कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।