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Karnal News: प्राकृतिक चिकित्सा अपनाने लगे लोग, हर रोज 25 से 30 लोग पहुंच रहे

Tue, 18 Nov 2025 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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मिट्टी लेप से इलाज करवाते लोग। स्रोत : स्वयं
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स्वीटी सांगवान
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पानीपत। प्राकृतिक खेती के साथ अब प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। पंचतत्व से मिलकर बने शरीर का इलाज पंचतत्व से ही किया जा रहा है। समालखा के पट्टीकल्याणा गांव स्थित प्राकृतिक जीवन केंद्र पर प्राकृतिक चिकित्सा के लिए प्रतिदिन 25 से 30 तक लोग प्राकृतिक विधि से इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। 100 बेड के अस्पताल में अन्य प्रदेशों से आकर भी लोग इलाज कराने आ रहे हैं। केंद्र में पंचतत्व के माध्यम से घुटना दर्द, बीपी, सर्वाइकल, स्त्री रोग, लीवर संबंधी, डायबिटीज, रक्त प्रवाह संचालित करना, मोटापा, गैस, पेट की सफाई, माइग्रेन आदि का इलाज किया जा रहा है।
डॉ. संदीप कुमार जैन ने बताया कि केंद्र में प्रतिदिन के 25 से 30 नए मरीज पहुंच रहे हैं। पहले की अपेक्षा अब लोगों का प्राकृतिक चिकित्सा पर विश्वास बढ़ रहा है। प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों से भी लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पेट सफाई व गैस संबंधी विकार के लिए, घुटनों के दर्द, सर्वाइकल का एनिमा से इलाज किया जाता है। इसमें मसाज भी की जाती है। नसों के दर्द और रक्त प्रवाह संचालित करने के लिए भाप स्नान करवाया जाता है। यह मोटापे में भी लाभकारी सिद्ध होता है। हिम बाथ टब से स्त्री रोगों का, मोटापे का, पेट और लीवर संबंधी बीमारियों का इलाज किया जाता है। फुल टब बाथ से घुटने और पैर संबंधी बीमारियों का इलाज होता है। बीपी और शुगर के लिए मिट्टी लेप या गड्डा मिट्टी लेप किया जाता है। गड्डा मिट्टी लेप में लगभग दो से तीन फीट के गड्डे में 40 मिनट के लिए व्यक्ति को रखा जाता है।
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उपचार सुविधा
प्राकृतिक चिकित्सा से फिजियोथेरेपी, कपिंग थेरेपी, एक्युपक्चंर, एनीमा, मालिश, भाप स्नान, रीढ़ स्नान, सूर्य स्नान, मिट्टी चिकित्सा, कटि स्नान, फुल टब बाथ, सोना बाथ से किया जाता है। पंचकर्मा में शिरोधारा, जानुबस्ती, कटि बस्ती, ग्रीवा बस्ती, पोटली मसाज, पाऊडर मसाज और सर्वांग अभ्यंगम द्वारा किया जाता है।
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पहले की अपेक्षा अब लोगों का रुझान प्राकृतिक चिकित्सा पर बढ़ रहा है। एक साल में लगभग एक हजार लोगों का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से हो जाता है। इनमें से 60 प्रतिशत लोग बिल्कुल ठीक होकर केंद्र से जाता है और शेष 40 प्रतिशत वे लोग रहते हैं जो चिकित्सा को बीच में छोड़कर चले जाते हैं वे इलाज लंबा होने के कारण इसे पूरा नहीं करते हैं।
आनंद कुमार श्रण, सचिव प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र पट्टीकल्याणा।
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