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Karnal News: मरीजों का बढ़ेगा दर्द, ऑपरेशन के लिए करना पड़ेगा इंतजार

Wed, 29 Oct 2025 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिले में हर दिन करीब 250 से अधिक सर्जरी करने वाले आयुष्मान पैनल से जुड़े निजी अस्पतालों में 11 तरह की सर्जरी नहीं करने के फैसले से मरीजों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। सोमवार की शाम सरकार ने आयुष्मान पैनल से जुड़े इन अस्पतालों में बड़ी सर्जरियां बंद करा दी हैं। अब ये सभी सर्जरियां केवल सरकारी अस्पतालों में होंगी। जिस कारण निजी अस्पतालों में जाने वाली इतनी संख्या में मरीज अब सीधे जिला नागरिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की तरफ जाना पड़ेगा।

जिले के करीब 10 बड़े अस्पतालों में रोजाना तीन से चार ऑर्थोपेडिक सर्जरियां होती थीं, जिनमें घुटना और हिप बदलने (टोटल नी और हिप रिप्लेसमेंट) जैसे महंगे और बड़े ऑपरेशन शामिल थे। वहीं, आंखों की भी सात से आठ सर्जरियां प्रतिदिन की जाती थीं। जनरल सर्जरी में भी हर्निया रिपेयर, अपेंडिक्स, बवासीर, हाइड्रोसील और खतना जैसी सर्जरियां रोजाना सात से आठ होती थीं। अब इन सभी मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जिससे वहां भीड़ और वेटिंग लिस्ट दोनों बढ़ेंगी। इन सर्जरियों में 30 मिनट से लेकर चार घंटे तक का समय लगता है और मरीज को 1 से 10 दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है। ऐसे में भले ही सरकारी अस्पतालों के पास ऑर्थो, नेत्र और जनरल सर्जरी के लिए दो-दो सर्जन ही हैं और हर दिन अलग अलग ओपीडी की सर्जरी के लिए विभाजित किया गया है। ऐसे में अगर सभी मरीज सरकारी में आएंगे तो सीधे तौर पर सरकारी अस्पतालों पर भार पड़ने वाला है।
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- निजी अस्पताल में नहीं होंगी ये सर्जरियां-
ऑर्थोपेडिक : टोटल नी रिप्लेसमेंट, टोटल हिप रिप्लेसमेंट (सीमेंटेड, सिमेंटलेस, हाइब्रिड), रिवीजन हिप व नी रिप्लेसमेंट।

ईएनटी : टॉन्सिलेक्टोमी (एक तरफ या दोनों तरफ), एडेनॉइडेक्टोमी और टायम्पेनोप्लास्टी (कान की सर्जरी)।

जनरल सर्जरी : हर्निया रिपेयर, फंडोप्लिकेशन, इन्सीशनल हर्निया, अपेंडिक्स सर्जरी (लैप व ओपन), हेमोरॉयड (स्टेपल व बिना स्टेपल), हाइड्रोसील ऑपरेशन, खतना और हर्निया-हाइड्रोसील पैकेज।


- सरकारी अस्पतालों पर बढ़ेगा दबाव
फिलहाल जिला नागरिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोजाना औसतन 2000 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ऐसे में सर्जरी का अतिरिक्त भार आने से वेटिंग और बढ़ जाएगी। खासकर बुजुर्ग मरीज, जिन्हें घुटना या हिप बदलवाने जैसी सर्जरी की जरूरत होती है, अब लंबा इंतजार झेलेंगे। करीब दो महीने पहले निजी अस्पतालों की हड़ताल के दौरान भी इलाज सेवाएं ठप रही थीं। कुछ समय बाद इलाज दोबारा शुरू हुआ था, लेकिन अब सरकार के फैसले से ये सेवाएं फिर से बंद हो गई हैं।


सर्जरी बंद करने का फैसला आईएमए का नहीं सरकार का है, सरकार ने आयुष्मान पोर्टल में बंद की गई सेवाओं की अपलोडिंग बंद कर दी है। शायद इसके पीछे यही वजह है कि सरकार पहले का ही भुगतान नहीं कर पा रही है, सर्जरी होती रहेंगी तो पैसा भी बढ़ता रहेगा। सरकार ने अब तक कुल बकाया में से 50 प्रतिशत ही भुगतान किया है।
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- डॉ. दीपक प्रकाश, प्रधान, जिला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

हरियाणा सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं। ये सभी सर्जरी पहले भी सरकारी अस्पताल में हो रही हैं। वहीं पहले भी जो चार सर्जरी बंद की गई थी उस समय भी स्थिति सामान्य थी। डॉक्टर पूरी तरह से ये सर्जरी करने और जितने भी मरीज आते हैं सभी का इलाज करने के लिए सक्षम हैं। किसी भी प्रकार की वेटिंग नहीं है।
- डॉ. दीपक गोयल, जनसंपर्क अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
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