सिविल अस्पताल में संदिग्ध डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा
होता जा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है
कि एक ही दिन में रविवार को करीब 20 नए मरीज राजकीय कल्पना चावला मेडिकल
कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती हुए। इन सभी को तेज बुखार और संदिग्ध डेंगू के
लक्षण हैं। इनमें से कुछ को छोड़कर करीब 70 प्रतिशत मरीजों के प्लेटलेट्स
भी कम पाए गए हैं।
रविवार को फिर अस्पताल में व्यवस्था की पोल खुली। यहां
भर्ती होने के लिए आ रहे मरीज और उनके तीमारदार घर से फोल्डिंग लेकर आ रहे
थे, क्योंकि अस्पताल में पर्याप्त बेड न होने से उन्हें परेशानी झेलनी
पड़ती। एक साथ मरीजों के आने पर स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ गई है। सिविल
अस्पताल की व्यवस्था की बात करें तो यहां मरीजों के इलाज के लिए न तो कोई
कमरा बचा है और न ही बेड, इसलिए मरीजों को इमरजेंसी कक्ष से बाहर गैलरी
स्थान दिया गया है। मरीज खुद अपने घर से फोल्डिंग लेकर आ रहे हैं।
रामभरोसे मरीजों की जिंदगी
अस्पताल
का हाल बेहाल हो चुका है। यहां एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाने के
बाद भी व्यवस्था ऑउट ऑफ कंट्रोल होते जा रही है। ट्रामा सेंटर सहित पूरे
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। घायल मरीजों को भी बेड न होने के अभाव में
स्ट्रेचर के साथ-साथ फर्श तक पर लेटाने की नौबत आन पड़ी है। ऐसे में यहां
आने वाले मरीजों की जिंदगी अब सिर्फ रामभरोसे है, चूंकि फर्श पर इन मरीजों
को संक्रमण का खतरा 100 फीसदी अधिक हो जाता है।
हर तीसरा सैंपल डेंगू पॉजिटिव
डेंगू
की स्थिति में बेशक अब पहले से कुछ सुधार आ रहा है, लेकिन अभी भी स्थिति
यह है कि यहां आने वाले हर तीसरे मरीज को डेंगू हो पॉजिटिव घोषित किया जा
रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े खुद इसके गवाह हैं। स्वास्थ्य विभाग की
टीम ने अब तक जिन 300 लोगों के डेंगू के सैंपल भरे हैं, उनकी संख्या 300 है
और इनमें से 89 केस पॉजिटिव पाए गए हैं।
कोट
अब स्थिति
नियंत्रण में आ रही है। अधिक भीड़ होने के कारण कई बार अस्पताल में कुछ
दिक्कतें आ जाती हैं। स्टाफ की कमी को भी जल्द ही सरकार पूरा कर देगी।
-डॉक्टर एसएल वर्मा, सिविल सर्जन, करनाल।