सीबीएसई स्कूलों की हड़ताल को अभिभावकों ने अवैध करार देते उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभिभावक एकता मंच के बैनर तले अभिभावकों ने वीरवार को जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और हड़ताल पर जाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
इस ज्ञापन की प्रति कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, डीसी, एसपी करनाल, एसडीएम करनाल और सीबीएसई बोर्ड पंचकूला को भी भेजी गई है।
अभिभावक एकता मंच के सदस्यों ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश अनुसार एक कमेटी का गठन किया गया है, जो कि सेक्शन 134-ए के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े और बीपीएल परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करेगी।
प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि इस कमेटी के गठन से प्राइवेट स्कूल जो कि सेक्शन-134 के तहत दो लाख रुपये तक की आय वाले अभिभावकों के बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे थे उन सभी प्राइवेट स्कूलों पर अंकुश लग पाएगा।
सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने यहां दाखिल कुल बच्चों को 10 प्रतिशत सेक्शन 134-ए के तहत दाखिला देना पडे़गा, जो स्कूल हुडा सेक्टर में स्थापित हैं, उनको अपने स्कूल में दाखिल सभी बच्चों का 20 प्रतिशत दाखिला देना पडे़गा।
सेक्शन 134-ए के अंतर्गत अभिभावकों को सरकारी स्कूलों के बराबर फीस देनी पड़ती है, जो कि आठवीं कक्षा तक शून्य व बारहवीं कक्षा तक नाममात्र की है। इस कमेटी के गठन का शहर में चारों ओर ही स्वागत हो रहा है।
इस फैसले से अभिभावक बहुत खुश हैं, लेकिन स्कूल संचालक जिनके लिए बच्चों का प्राथमिकता शिक्षा एवं उनका भविष्य नहीं है बल्कि पैसा है, ऐसे स्कूल संचालक वीरवार को हडताल पर चले गए।
अब जबकि बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं और उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाने की जरूरत है, ऐसे में स्कूल संचालकों द्वारा हड़ताल करना अनैतिक, असंवैधानिक और गैर कानूनी है।
अभिभावक एकता मंच के अध्यक्ष दिनेश नरूला ने कहा कि आज एक बार फिर स्कूलों का लालची और अमानवीय चेहरा समाज के सामने आ गया है।
उन्होंने कहा कि अभिभावक एकता संघ सभी सामाजिक संगठनों, जन प्रतिनिधियों, समाज के जागरूक नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, धार्मिक संगठनाें और राजनीतिक दलों से आह्वान करता है कि हड़ताल पर जाने वाले स्कूलों के खिलाफ आवाज उठाएं ताकि बच्चों का भविष्य संवारा जा सके।
मंच के सदस्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की कि बच्चों की पढ़ाई पर कुठाराघात करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।