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Karnal News: पंच पर्व कल से शुरू, घर से बाजार तक छाएगी खुशहाली

Fri, 17 Oct 2025 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। दिवाली के पंच पर्वों की शृंखला शनिवार से शुरू हो रही है। इस कड़ी का पहला त्योहार धनतेरस मनाया जाएगा। पंच पर्वों की धूम घरों से लेकर बाजार तक दिखाई दे रही है। घरों में सफाई, रंगाई पुताई और साज सज्जा की तैयारियां जोरों पर है। बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है।
कर्ण गेट, सराफा बाजार, रामनगर, प्रेम नगर, सदर बाजार सेक्टर-13 मार्केट और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की दुकानों पर भीड़ लगातार बढ़ रही है। बच्चों, महिलाओं से लेकर युवाओं तक में खरीदारी को लेकर जोश देखा जा रहा है, यही कारण है कि शहर के बाजार देर रात गुलजार हैं। बाजार को आकर्षक तरीके से सजाया भी गया है।
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धनतेरस-
पंचपर्व की शृंखला का धन तेरस पहला पर्व है, ये पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन त्रयोदशी की दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 19 अक्तूबर को दोपहर 01 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। श्री कर्णेश्वरम महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी षष्ठी वल्लभ ने बताया कि धन त्रयोदशी को धनाध्यक्ष कुबेर की पूजा की जाती है। इस दिन बर्तनाें एवं सोने चांदी, डायमंड की खरीदारी की जाती है। इस दिन विशेष रूप से श्री लक्ष्मी नारायण की पूजा करनी चाहिए। इसी दिन कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भगवान धनवंतरि की पूजा की जाएगी। समुद्र मंथन के समय भगवान धनवंतरि समस्त रोगों के उपचार की औषधियां लेकर उत्पन्न हुए थे।
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नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली


श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, ये 19 अक्तूबर को दोपहर 1:45 बजे से 20 अक्तूबर को दोपहर 3:45 बजे तक रहेगी। इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। नरक चतुर्दशी को यमुना, नदी, नहर, तालाब के किनारे चार मुंह वाला दीपक जलाना चाहिए। इस दौरान यमराज का स्मरण करना चाहिए, इससे मृत्यु का भय कम होता है और जीवन में अकाल मृत्यु या अनहोनी की आशंका से मुक्ति मिलती है। इस दिन विशेष रूप से यमदेव की पूजा होती है। इस दिन श्रद्धालुओं को दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके चारमुख वाला तेल का दीपक जलाना चाहिए। यमुना, यम की बहन है। इसलिए इस दिन यमुना में स्नान करना शुभ माना गया है, इस दिन तेल नहीं लगाना चाहिए।

दीपावली


20 अक्तूबर को दिवाली का मुख्य पर्व पर्व मनाया जाएगा। इस दिन अमावस्या तिथि दोपहर बाद 03 बजकर 45 में शुरू हो रही है, जो पूरी रात्रि और 21 अक्तूबर को शाम 05 बजकर 55 मिनट रहेगी। 20 अक्तूबर को प्रदोष काल, निशीथ काल व महानिशीथ काल में अमावस्या तिथि है।, जबकि 21 को प्रदोष काल को अमावस्या स्पर्श मात्र कर रही है। केवल 10 मिनट मात्र अमावस्या है। इसलिए 20 अक्तूबर को दिवाली पर्व मनाया जा सकता है। 21 अक्तूबर को सुबह पित्र पूजन व पित्रों के निमित्त दान आदि कर सकते हैं, जो लोग पित्र पूजा के बाद लक्ष्मी पूजन करते हैं वे 21 अक्तूबर को भी पूजा कर सकते हैं। पितृ पूजन कर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और वस्त्र दान करे। दिवाली की रात को महालक्ष्मी पूजन करना चाहिए और रात्रि में मां के नाम का कीर्तन करना चाहिए। इस दिन चांदी के लक्ष्मी गणेश की पूजा करना श्रेष्ठ है। शाम को थाली में 11,21 या 31 दीपक जलाकर घर के घर कोने में रखने चाहिए।
अन्नकूट/गोवर्धन पूजा


ये पर्व 22 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन गोवर्धन, अन्नकुट और भगवान विश्वकर्मा की पूजा होगी। इस साल गोवर्धन पूजा पर दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से शाम 05 बजकर 49 मिनट तक शुभ मुहूर्त बन रहा है। गोवर्धन पूजा में भक्तों को अपने दिन की शुरुआत पवित्र स्नान से करनी चाहिए, उसके बाद गाय के गोबर से एक पर्वत बनाना चाहिए, जो गोवर्धन पर्वत का प्रतीक है। इसके बाद, भगवान कृष्ण के सम्मान में भजन और मंत्र गाते हुए इस प्रतीक की परिक्रमा करते हैं। वहीं श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दिन अपने औजारों की पूजा कर प्रसाद बांटते है और अन्नकूट के भंडारे में सभी सब्जी को मिक्स कर प्रसाद बनाकर बांटा जाता है।
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भैया दूज


दिवाली के पंच पर्व का ये आखिरी पर्व है, जो इस बार 23 अक्तूबर को मनाया जाएगा। भाई-बहन के असीम प्रेम का प्रतीक पर्व भैया दूज पर बहनें भाई के माथे पर तिलक करती हैं। भाइयों से सुरक्षा की प्रार्थना करती हैं। द्वितीया तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर को रात्रि 08 बजकर 16 मिनट पर होगी। वहीं, द्वितीया तिथि समापन 23 को रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगा। इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
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