नीलोखेड़ी/करनाल। जोश और जुनून चाहिए, आप हर मंजिल पा सकते हैं, कुछ भी हासिल करना मुमकिन है। जिले के कई खिलाड़ियों ने दिव्यांगता को मात देकर नाम कमाया। वे मिसाल बनकर उभरे हैं। क्रिकेट में वेदपाल धीमान और पवन कुमार का नाम अब सभी की जुबान पर है। बैडमिंटन में नितेश कुमार व नीरज की कर्ण नगरी में धाक है। चारों खिलाड़ी भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करके जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
नीलोखेड़ी कस्बे के अंजनथली निवासी 39 वर्षीय वेदपाल धीमान ने कभी दिव्यांगता को अपने पर हावी नहीं होने दिया। पांच साल कड़ी मेहनत की। आज ऑलराउंडर के रूप में स्थापित हैं। वह हरियाणा व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। ऑलराउंडर क्रिकेटर पवन कुमार भी अन्य खिलाड़ियों के लिए मिसाल पेश कर रहे है। वह निसिंग कस्बे के वार्ड-13 में रहते हैं।पिछले चार साल से इंडिया दिव्यांग क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं।
बचपन में ही खो दिए थे दोनों पैर
वेदपाल ने बताया कि एक साल के थे जब उनको पोलियो हुआ था। उपचार के लिए पिता ने भागदौड़ की लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए। वेदपाल ने बताया कि सरकार की ओर से दी जाने वाली साधारण व्हीलचेयर पर क्रिकेट का अभ्यास करना बड़ा मुश्किल था। वर्ष 2023 में पूर्व विधायक धर्मपाल गोंदर ने टीम को 15 स्पोर्ट्स व्हीलचेयर उपलब्ध कराकर उनके सपनों को पंख लगाने का काम किया। शुरुआत में सोनीपत में अभ्यास के बाद जनवरी, 2019 में उन्होंने नीलोखेड़ी में ही अभ्यास शुरू किया। इस दौरान क्षेत्र के अन्य दिव्यांगों को भी क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करते रहे। बोले कि पेरिस में वर्ष 2024 में आयोजित पैरा ओलंपिक पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार को वह आदर्श मानते हैं।
हौसले से पा लिया अपना मुकाम
क्रिकेटर पवन कुमार ने जोश भरे स्वर में बताया कि दिव्यांगता नहीं आर्थिक तंगी के कारण जरूर उन्हें कुछ मुश्किल आई। हौसले से आगे बढ़ते रहे। दृढ़ संकल्प से उन्होंने यह मुकाम पा ही लिया। वर्ष 2024 में उनका चयन श्रीलंका में आयोजित पीडी चैंपियन ट्रॉफी के लिए हुआ, जोकि एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता है। इस टी-20 प्रतियोगिता के पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 26 रन देकर तीन विकेट लिए थे। दूसरे मैच में उन्होंने चार ओवर में 30 रन देकर दो विकेट झटके थे। उनकी इस उपलब्धि ने भी उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। पवन ने मुंबई में आयोजित शृंखला में पहले ही मैच में तीन विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई और सीरीज में कुल 10 विकेट चटकाए। इसकी बदौलत भारत ने सीरीज अपने नाम की थी।
पैरा ओलंपिक में जीत लिया पदक
नितेश ने वर्ष 2009 में रेल हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था। दुर्घटना उनका हौसला नहीं कम कर पाई। बैडमिंटन में नाम कमाया। कर्ण स्टेडियम के कोच नितेश कुमार ने ऐसी अवस्था में जहां पर लोग सारी उम्मीदें छोड़ देते हैं, सफलता की ओर का रास्ता शुरू किया। पिता बिजेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में नितेश ने पहली बार नेशनल में कांस्य पदक जीता। वर्ष 2017 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीत दर्ज की। वर्ष 2024 पेरिस पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीता।
कमजोरी को बना लिया ताकत
नीरज पैदाइशी रूप से 40 प्रतिशत शरीर से दिव्यांग हैं। उन्होंने अपनी इस कमजोरी को ताकत बना लिया। बचपन से ही संघर्ष ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बना दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन किया। नीरज ने बताया कि माता-पिता ने जल्द ही शादी कर दी थी। शादी के बाद 10 साल तक घर में ही रही। उनके पति सुभाष शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने हौसला बढ़ाया तो बैडमिंटन खेलना शुरू किया। उन्होंने इसी वर्ष खेलो इंडिया गेम्स में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके अलावा स्पेन व ऑस्ट्रेलिया में कांस्य पदक पर कब्जा किया। नीरज पैरा ओलंपिक के लिए तैयारी कर रही है।
पवन कुमार
पवन कुमार
पवन कुमार