जितेंद्र नरवाल
करनाल। करीब 15 लाख की आबादी और 2520 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले जिले में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी महज 2113 पुलिसकर्मियों के कंधों पर है। जिले की जनसंख्या करीब 15:05 लाख है। इस हिसाब से जिले में हर एक पुलिसकर्मी पर औसतन 712 नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा आ गया है। बढ़ती जनसंख्या और अपराध दर के बीच पुलिस बल की यह भारी कमी चिंता का विषय बनती जा रही है।
यूं तो जिले में जरूरत 2470 पुलिस कर्मियों की है, लेकिन 357 पदों के रिक्त होने के चलते मौजूदा पुलिस कर्मियों पर ही लोगों की सुरक्षा का अतिरिक्त कार्यभार है। जिले में बढ़ती जनसंख्या और अपराध दर को देखते हुए पुलिस बल में वृद्धि की आवश्यकता है। गौरतलब है कि जिले में शहर के अलावा 435 गांव हैं। प्रशासनिक दृष्टि से यहां नौ ब्लॉक और सात नगर निकाय बनाए गए हैं। जिले में कानून व्यवस्था को संभालने के लिए 19 थाने और 14 चौकियां कार्यरत हैं।
इसके अतिरिक्त साइबर थाना और बाजार क्षेत्र में एक ट्रैफिक चौकी भी स्थापित किया गया है। जिले के प्रमुख थानों में करनाल सिटी, सिविल लाइन, सेक्टर-32/33, सदर, बुटाना, निगदू, मधुबन, मूनक, असंध, इंद्री, निसिंग, घरौंडा, तरावड़ी और कुंजपुरा थाने शामिल हैं। सिटी थाना क्षेत्र में सदर बाजार और सेक्टर-4 की चौकियां, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में सेक्टर-13 और मॉडल टाउन चौकियां संचालित हैं। सेक्टर-32/33 थाना क्षेत्र में सेक्टर-9 चौकी, सदर थाना क्षेत्र में जुंडला और रंबा चौकियां, बुटाना थाना क्षेत्र में नीलोखेड़ी चौकी, निगदू थाना क्षेत्र में सीतामाई चौकी, मधुबन थाना क्षेत्र में मंगलौरा चौकी, मूनक थाना क्षेत्र में बल्ला चौकी, असंध थाना क्षेत्र में जलमाना और सालवन चौकियां तथा इंद्री थाना क्षेत्र में बयाना चौकी स्थापित है। महिला थाना करनाल और असंध के अलावा हाईवे थाना भी जिले में विशेष कार्य के लिए कार्यरत है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए अलग से साइबर थाना भी शुरू किया गया है।
स्पेशल टीमें भी गठित : थानों और चौकियों के अलावा पुलिस विभाग ने विशेष मामलों की जांच के लिए सात स्पेशल टीमें गठित कर रखी हैं। इनमें सीआईए वन, सीआईए टू, असंध सीआईए, डिटेक्टिव स्टाफ, एंटी नारकोटिक्स सेल, एंटी ऑटो थेफ्ट सेल और इकोनॉमिक्स सेल शामिल हैं।
ये टीमें हत्या, लूट, चोरी, नशा तस्करी और साइबर अपराध जैसे गंभीर मामलों की त्वरित जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष रूप से सक्रिय रहती हैं। हालांकि, पुलिस बल की भारी कमी के चलते इन टीमों पर भी भारी दबाव बना रहता है।