संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। असंध क्षेत्र के उपलाना गांव की 16 वर्षीय छात्रा निक्की कश्यप की डेढ़ साल पहले हुई संदिग्ध हालात में मौत के मामले में शुक्रवार को परिजन और सामाजिक संगठनों ने रोष प्रदर्शन किया। परिजनों ने कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की जिला इकाई के साथ मिलकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
मृतका की मां मीना और पिता जोगिंद्र ने बताया कि उनकी बेटी निक्की कश्यप गांव के एक निजी स्कूल में पढ़ती थी। आरोप है कि स्कूल में प्रधानाचार्य और अन्य स्टाफ सदस्यों की लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान थी। इसी के कारण बेटी ने 8 अगस्त, 2024 को आत्महत्या कर ली। उन्होंने बिना पोस्टमार्टम करवाए संस्कार कर दिया था। 12 अगस्त को बेटी के बैग से सुसाइड नोट मिला था। इसके बाद उन्होंने असंध पुलिस को शिकायत दी थी।
शिकायत पर असंध थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी। लेकिन करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। परिजन का कहना है कि मधुबन लैब की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में सुसाइड नोट को निक्की की मूल हस्तलिपि में लिखा हुआ प्रमाणित किया गया है। इसके अलावा प्रधानाचार्य का नार्को टेस्ट भी उनके खिलाफ अहम साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इसके बावजूद आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होना प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
-
बैग से मिला था सुसाइड नोट
मां मीना ने बताया कि उनकी बेटी स्कूल से घर आई थी तो कहा कि उसे चक्कर आ रहे है। बेटी की तबियत ज्यादा बिगड़ गई। तुरंत असंध के एक निजी अस्पताल में लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने छात्रा को बीपी की समस्या बताई। छात्रा को करनाल रेफर कर दिया। छात्रा ने रास्ते में दम तोड़ दिया था। मां का आरोप है कि बेटी की मौत के बाद 12 अगस्त को निक्की के स्कूल बैग से सुसाइड नोट मिला था। इसमें प्रधानाचार्य और स्कूल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए थे।