स्थानीय व्यवसायियों व उद्यमियों के लिए उत्तर रेलवे की माल ढुलाई के लिए विशेष परिवहन सेवाएं मुहैया करवाने की योजना है। कई मुख्य शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है। इनमें हरियाणा के करनाल व तरावड़ी का नाम शामिल है। यदि यह योजना परवान चढ़ती है तो सड़क परिवहन पर निर्भर व्यवसायियों को मालगाड़ियों से माल ढुलाई की सुविधा मिलेगी।
उद्योगों को इससे बहुत फायदा होगा। उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के डीआरएम डिंपी गर्ग ने ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी प्रेषित की है। इसमें वर्णन है कि माल ढुलाई प्रेषक (फ्रेट फॉरवर्डर) का कार्य करने वाले लोग इसमें रुचि ले सकते हैं।
रेलवे की ओर से पहले भी करनाल के चावल उद्योगपतियों व निर्यातकों को यह प्रस्ताव दिया गया था। इसको लेकर करनाल के कर्ण लेक ओएसिस पर्यटन केंद्र पर रेलवे उच्च अधिकारियों व उद्योगपतियों की बैठक हुई थी। जरूरत के समय उद्यमियों को एक वैगन भी उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव दिया था। वह योजना फिलहाल विचाराधीन है।
करनाल से सड़क परिवहन से चावल, चीनी, गेहूं, कृषि यंत्र के अलावा उद्योगों में तैयार किया जाने वाला सामान भेजा जाता है। इसके अलावा करनाल व आसपास के जिलों से दिल्ली की सब्जी मंडी में पूरा वर्ष सब्जियां भेजी जाती हैं।
नागपुर में आलू भेजा जाता है। यह तमाम ढुलाई का अधिकतर कार्य सड़क परिवहन पर निर्भर है। हालांकि रेलवे को भी करनाल से माल ढुलाई से हर महीने सात से आठ करोड़ तक का राजस्व प्राप्त हो रहा है।
रेल यात्री संघ के पदाधिकारी अंशुल नारंग ने कहा कि माल ढुलाई के लिए रेलवे की सेवाएं सड़क परिवहन से कहीं ज्यादा बेहतर हैं। करनाल से उद्योग का माल महाराष्ट्र भेजना हो तो सड़क मार्ग से समय ज्यादा लगता है। मालगाड़ी से ढुलाई करने पर समय की बचत के साथ भाड़े में भी बचत होगी। सुरक्षित माल पहुंचेगा। रेलवे ने करनाल स्टेशन पर 2012 में पार्सल सेवा बंद कर दी थी।