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Karnal News: कटाई के लिए नहीं मजदूर, कंबाइन की वेटिंग लंबी, मौसम बढ़ा रहा चिंता

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- 15 दिनों में महज 10 फीसदी पकी फसल की हुई कटाई, 90 प्रतिशत खेतों में खड़ी
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सुखदेव चौहान

करनाल। कभी अंधड़ तो कभी काली घटाएं और बेमौसमी बारिश किसानों की चिंता बढ़ा रही हैं। क्योंकि गेहूं की फसल पककर तैयार है। किसानों को कटाई के लिए न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही कंबाइन ठेकेदारों के पास समय है। इनके पास बुकिंग के हिसाब से समय निर्धारित है। ऐसे में बदलता मौसम किसानों की धड़कनें बढ़ रहा है।

15 दिनों में केवल 10 प्रतिशत रकबे में ही गेहूं की कटाई हो पाई है। जबकि 90 फीसदी गेहूं की कटाई शेष है। इधर, कंबाइन ठेकेदारों की स्थिति देखें तो एक-एक ठेकेदार के पास 70 से 100 किसानों का ठेका है। ये भी रोजाना दो से पांच किसानों के खेत में कटाई का कार्य कर पा रहे हैं। जबकि अन्य कार्य की वेटिंग हैं। क्षेत्र या बुकिंग के आधार पर कार्य किया जा रहा है। उधर, मजदूर की कमी भी खलने लगी है। किसानों की ओर से उचित दाम न देने या मेहनत के बदले पर्याप्त अनाज समय पर न मिलने से निराशा है।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिले में गेहूं का कुल रकबा 4.05 लाख एकड़ है जिसमें से अभी तक केवल 40 हजार रकबे की कटाई हुई है। अभी भी गेहूं का 3.65 लाख एकड़ रकबा कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में यदि आगामी दिनों में भी बारिश होती है तो किसानों का गेहूं का रंग व दाना खराब हो सकता है।



फसल खराब होने का डर

कुंजपुरा खंड के किसानों संजीव, गुरमीत, राजीव, मुकेश, राजकुमार, हिसम सिंह, राजेश, सतीश, गुरमेज, मेजर सिंह, लाडी, गुरमुख्तार सिंह व करनैल सिंह का कहना है कि बूंदाबांदी व आंधी का खड़ी फसलों को नुकसान कम है। इस बार मजदूरों व कंबाइन की उपलब्धता पूरी न होने के कारण किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है। इस क्षेत्र में कंबाइन कम होने के कारण उनको बार-बार कटाई के लिए कहा जा रहा है, लेकिन एक ही समय में सारा रकबा कट पाना असंभव है इस कारण से वह भी अपने हिसाब से लगातार कटाई करते आ रहे हैं।



टिकरी गांव के जमीदार सोनू कुमार, रजनीश, सुनील, विनय, अजय, सुमित, रिंकू, अंकुर व विनोद का कहना है कि आजकल मजदूरों को राशन डिपो के माध्यम से खाने के लिए पर्याप्त अनाज मिल जाता है। इस कारण से वह गेहूं कटाई से कतराने लगे हैं।



36 में से एक एकड़ भी नहीं कटी फसल

टिकरी गांव के किसान राकेश ने बताया कि पिछले दो सालों से गेहूं काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। राशन डिपो पर समय पर बढ़िया अनाज मिलने के कारण अब लोग गर्मी के मौसम में गेहूं की कटाई से कतराने लगे हैं। समय पर मजदूर न मिलने से गेहूं का रकबा बेमौसमी बारिश के कारण खराब हो रहा है। उनका गेहूं का 36 एकड़ रकबा है, अभी एक भी खेत में कटाई नहीं हुई है। फसल तैयार है।
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ठेकेदार सूची के अनुसार कर रहे कटाई

नेवल के किसान कुलदीप सिंह का कहना है कि इस बार कंबाइन से गेहूं कटवाने के लिए भी बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। गेहूं का अभी तक केवल पांच प्रतिशत रकबा काटा गया है। बाकी का 95 प्रतिशत रकबा जब तक नहीं कट जाता, तब तक किसानों को बारिश का डर सताएगा। अब की बार गेहूं का सीजन देरी से है, सभी किसान मौसम साफ होने के कारण अपनी फसल के और ज्यादा पकने का इंतजार कर रहे थे, इस कारण से भी गेहूं अभी तक खेतों में खड़ी है।
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