जिले में जिस हवाई अड्डे को बनवाने का ढिंढोरा पिटा जा रहा है, दरअसल वह कहीं भी स्टैंड नहीं करता है। सांसद अश्विनी कुमार चोपड़ा ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से इस बारे में जवाब मांगा था जिसमें खुलासा हुआ है कि करनाल में इस तरह के किसी प्रोजेक्ट की प्रस्तावना नहीं है।
मालूम हो कि आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने अप्रैल में इस संदर्भ में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जानकारी हासिल की थी जिसमें कहा गया था कि करनाल हवाई अड्डे के उन्नयन के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। अब नागर विमानन मंत्रालय ने सांसद के सवाल के जवाब में कहा है कि करनाल में घरेलू हवाई अड्डे के लिए कोई प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया गया है। यद्यपि केंद्र सरकार की ओर से श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के शहरों में क्षेत्रीय विमान संपर्कता संवर्धन के लिए 50 स्थानों की पहचान की गई है, जिसके लिए जनसंख्या, दूरी और पर्यटन, उद्योग जैसे मानदंडों को ध्यान में रखा गया है। इन शहरों में करनाल भी शामिल हैं, लेकिन यहां के लिए अभी कोई प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ है।
पांच सौ एकड़ जमीन की जरूरत
आरटीआई कार्यकर्ता राजेश शर्मा ने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक करनाल में हवाई अड्डा बनाने के लिए करीब 500 एकड़ और हिसार में 490 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने कोई जमीन नहीं दी है। करनाल में हालांकि फ्लाइंग क्लब है, जिसे विस्तार करके हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया जाना था, लेकिन इसे भी अनुमति नहीं मिली है। सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच इस संदर्भ में कोई समझौता नहीं हुआ है।
सरकार ने भेजा था प्रस्ताव
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बताया था कि करनाल, हिसार, पिंजौर, रोहतक, भिवानी और नारनौल में हवाई अड्डे बनाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। फिजिबिलिटी की जांच के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हिसार व करनाल में स्थलों का दौरा किया है और सचिव नागर विमानन मंत्रालय और हरियाणा के मुख्य सचिव के मध्य हिसार और करनाल एयर फील्डस का घरेलू हवाई अड्डों के रूप में उन्नयन के लिए 31 जुलाई 2013 को बैठक हुई थी, लेकिन अभी तक कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई है।