जिले के साढ़े दस हजार वाहनों पर परमिट फीस की जबरदस्त मार पड़ गई है। परिवहन निगम ने परमिट फीस नौ गुणा तक बढ़ाकर वाहन संचालकों को झटका दिया है। जबकि अधिकारियों ने फीस बढ़ोतरी के साथ इनको हर साल फीस जमा करवाने की भी छूट दी है। पहले वाहन संचालकों को पांच साल की फीस जमा करानी पड़ती थी, अब हर साल फीस जमा करा सकते हैं। फीस बढ़ोतरी से वाहन संचालकों के पसीने छूटने लगे हैं और वे इसका विरोध करने लगे हैं।
जिले की बात करें तो सरकार के इस फैसले से जिले के दस हजार 566 वाहन संचालकों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इस महंगाई में इस फीस की बढ़ोतरी से किराया बढ़ाना तय है और इसका असर कहीं न कहीं आमजन पर पड़ेगा।
परिवहन निगम की तरफ से आए पत्र में दस फरवरी 2016 से परमिट फीस बढ़ाई गई है। अब जो भी वाहन संचालक फीस जमा कराने जा रहे हैं उन्हें नये नोटिफिकेशन का पता चल पा रहा है और फीस जमा करवाने की बजाये अतिरिक्त रुपये जोड़ने में लगे हैं। थ्री व्हीलर, कैंटर के अलावा हैवी व्हीकल पर बढ़ोतरी की गई है।
आरटीए विभाग के अनुसार, जिले में 2898 थ्री व्हीलर, 2024 लाइट व्हीकल (कैंटर व अन्य), 5644 हैवी व्हीकल रजिस्टर्ड हैं। बढ़ोतरी फीस से वाहन संचालकों का पसीना निकाल दिया है। थ्री व्हीलर के परमिट फीस पर चार गुणा, लाइट मोटर व्हीकल पर पांच गुणा और हैवी व्हीकल पर नौ गुणा अतिरिक्त परमिट फीस की है।
यह है परमिट फीस बढ़ोतरी
परिवहन निगम के आंकड़ों के मुताबिक थ्री व्हीलर संचालकों को पांच साल में परमिट फीस 520 रुपये जमा करानी पड़ती थी। अब यह बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दी है। इसको हर वर्ष 500 रुपये की किस्त में भी जमा कराया जा सकता है। लाइट मोटर व्हीकल (कैंटर व अन्य) के परमिट फीस 1850 रुपये थी, अब 10 हजार 200 रुपये कर दी है। इसको हर साल 2500 रुपये की किस्त के साथ जमा कराया जा सकता है। हैवी व्हीकल पर 2725 रुपये परमिट फीस थी, जो बढ़ाकर 25 हजार 200 रुपये कर दी है। हर साल छह हजार रुपये किस्त के साथ जमा करा सकते हैं।
वाहनाें की उम्र भी घटाई और फीस बढ़ाई
डीजल के वाहन संचालकों को दोहरा झटका लगा है। एनसीआर एरिया के वाहनों की 15 साल से घटाकर इनकी लाइफ दस साल पहले कर दी है। अब इनकी फीस भी कई गुणा बढ़ाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। संचालकों का कहना है कि सरकार ने कई गुणा फीस बढ़ाकर भार डाला है।
महंगाई को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो गलत है। दस साल वाहनों की उम्र करने से उसके पैसे ही मुश्किल से पूरे किये जाएंगे। ऊपर से फीस बढ़ाकर उनकी रोजी रोटी पर डाका डालने जैसी नौबत की है। ट्रक यूनियन के सदस्य गुरविंद्र सिंह का कहना है कि यह दोहरी मार है। पहले तो पुराने वाहनों के चलने पर ही बैन लगा दिया और अब यह फीस कई गुणा बढ़ा दी है।
वर्जन
मुख्यालय की तरफ से बढ़ोतरी परमिट फीस का पत्र आ चुका है। वाहन संचालक फीस जमा करा रहे हैं। नियमाें के तहत पूरे काम किये जा रहे हैं।
- प्रधुमन सिंह, आरटीए सचिव, करनाल।