सात जन्मों के बंधन में बंधे और तीन माह बाद साथ ही दुनिया छोड़ चले
होली पर्व पर शुक्रवार को गैस चढ़ने से हुई नवदंपती की मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ सा टूट गया है। शनिवार को एक ही साथ जब पति और पत्नी दोनों की अर्थी उठी तो हर आंखें नम हो गईं। तीन माह पहले ही विवाह बंधन में बंधने के साथ ही दोनों ने सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाईं थीं।
किसी को क्या पता था कि तीन माह में दोनों दुनिया छोड़ जाएंगे। दोनों के अंतिम संस्कार के बाद भावुक पिता मांगे राम ने कहा कि होली खेलकर लौटने के बाद करीब डेढ़ बजे दोनों पति पत्नी ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया था, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
जिस घर में सुबह से होली का उल्लास था, वहां शाम होने से पहले ही मातम छा गया। दरअसल होली खेलने के बाद लौटे नवदंपती रंग छुड़ाने के लिए साथ ही बाथरूम में गए। इस दौरान गीजर की गैस से दोनों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को जब दोनों पति-पत्नी की साथ ही अर्थी उठी तो सैकड़ों की संख्या में शामिल परिजन और अन्य लोगों की आंखों भर आईं। सभी की जुबां पर यही बात थी कि तीन माह पहले ही तो दोनों सात जन्मों के बंधन में बंधे थे, लेकिन शादी के तीन माह बाद ही दुनिया को छोड़ गए।
विदित हो कि लगभग तीन साल के अंतराल में मांगे राम के परिवार ने पूरे शहर में मिठ्ठन हलवाई के नाम से अपनी पहचान बना ली है। मूल रूप से पानीपत के रहने वाले मांगे राम लगभग तीन साल पहले घरौंडा में आए थे। उन्होंने रेलवे रोड पर मिठ्ठन स्वीट्स के नाम से दुकान शुरू की थी।
अपने सरल स्वभाव से उन्होंने पूरे शहर में अलग पहचान बनाई थी। लगभग एक साल पहले अपना मकान भी खरीद लिया था। मकान खरीदने के बाद बेटे गौरव की शादी भी घरौंडा में ही कर दी थी। होली की सुबह तक पूरा परिवार खुश था, लेकिन परिवार को ये मालूम नहीं था कि इतनी जल्द खुशियां गम में बदल जाएंगी। मांगे राम ने बताया कि बेटा गौरव और पुत्र वधू बहुत ही सरल स्वभाव के थे। पुत्र वधू सुबह सात बजे उसे चाय देकर प्रतिदिन आशीर्वाद लेती थी, जिससे मन बहुत खुश होता था।
कार्बन डाइऑक्साइड गैस बहुत खतरनाक
गैस गीजर के मैकेनिक अनिल कुमार ने बताया कि कार्बन डाइऑक्साइड गैस बंद बाथरूम में बड़ी खतरनाक होती है, इसलिए बाथरूम से गैस निकालने के लिए एग्जॉस्ट फैन या वेंटीलेशन होना जरूरी है। गैस गीजर अगर खुले में लगा लें तो बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन बंद जगह में यह खतरनाक है। उन्होंने बताया कि यह गीजर कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है और इंसान भी कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है। यही कारण है कि बंद बाथरूम में ऑक्सीजन की कमी से दम घुटने लगता है। अगर 15 से 30 मिनट के अंदर बचाव नहीं होता तो व्यक्ति की जान जा सकती है।
ये है बचाव के उपाय
- गैस गीजर हमेशा खुले में लगाएं।
- बाथरूम में वेंटीलेशन और एग्जॉस्ट फैन होना जरूरी
- बाथरूम की छत ज्यादा नीचे नहीं होनी चाहिए
- सिलिंडर को बार-बार चेक करना चाहिए
- दुर्गंध आने पर मैकेनिक की सलाह जरूर लें
- बगैर जानकारी के स्वयं गीजर ठीक न करें
- सिलिंडर की पाइप निकाल कर वापस डालते हैं तो लीकेज का खतरा रहता है