दयाल सिंह कॉलेज में हरियाणा संस्कृत अकादमी और संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में वर्तमान में संस्कृत भाषा की स्थिति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उसका प्रतिबिंब विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रिंसिपल डॉ. आशिमा गक्खड़ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा के पूर्व कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार देवता अमर हैं उसी प्रकार संस्कृत भाषा भी अपने विशाल साहित्य लोकहित की भावना के द्वारा अमर है। संस्कृत भाषा अन्य भाषाओं की तरह केवल अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है बल्कि वह मनुष्य के सर्वाधिक संपूर्ण विकास की कुंजी भी है। नई शिक्षा नीति से संस्कृत भाषा को मजबूती मिलेगी।
अकादमी के निदेशक डॉ. दिनेश शास्त्री ने कह कि संस्कृत में विद्यमान महान ज्ञान संपदा को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की महती आवश्यकता है। आज पूरा विश्व संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता और प्रामाणिकता को समझ रहा है। कई विदेशी विद्वानों ने भी संस्कृत के शास्त्रों का गहन अध्ययन चिंतन और मनन भी किया है। नई शिक्षा नीति के स्वरूप को देखकर हमें लगता है कि फिर से संस्कृत के पुराने दिन लौट आएंगे और हम अपनी संस्कृति के प्रति समर्पित होंगे। संयोजक डॉ. रणधीर सिंह, वक्ता डॉ. कामदेव झा, सुभाष गुप्ता, डॉ. सुप्रिया संजू, डॉ. सत्यपाल शर्मा, डॉ. मिथिलेश शर्मा और डॉ. राजवीर सिंह गुलिया ने भी विचार रखे। इस अवसर पर संजय शर्मा, प्रवीण डांडा, बलबीर सिंह, जयकुमार, सरिता आर्य, रितु शर्मा, उषा, सुभाष सैनी और सारिका चौधरी मौजूद रहे। ब्यूरो