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6 माह बाद स्कूल पहुंचे बच्चे, बैग न यूनिफार्म, थर्मल स्क्रीनिंग पर जोर

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करीब छह महीने बाद अनलॉक में सोमवार को स्कूल खुले तो बहुत कम ही बच्चे कक्षाओं में पहुंचे। लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जा रहा था, बच्चे और शिक्षक सभी मास्क लगाए हुए थे। प्रवेश से पहले उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही थी। कई स्कूलों में तो बच्चों के साथ अभिभावक भी पहुंचे।
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इस दौरान उन्होंने सिलेबस संबंधी समस्याएं रखी तो शिक्षक ने उनका समाधान किया। वहीं दूसरी ओर समस्या का समाधान होते देख बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। जवाब में बच्चों ने भी शिक्षक का धन्यवाद किया।
जिले भर के 9वीं से 12वीं कक्षा तक के करीब 400 सरकारी और प्राइवेट मिलाकर में पहुंचे बच्चों में उत्साह दिखाई दिया। किसी स्कूल में 10 तो कहीं 50 विद्यार्थी ही पहुंचे। कई स्कूलों मे ंछात्र संख्या पहले दिन शून्य भी रही।
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ना बैग ना यूनिफार्म, सिर्फ मास्क के बारे में पूछा
किसी भी विद्यार्थी को स्कूल बैग या यूनिफार्म में आने की बाध्यता नहीं थी। विद्यार्थी को अपनी जिस विषय की दिक्कत का समाधान करना था, वह केवल उसी विषय की किताब लेकर ही स्कूल पहुंचे। वहीं गेट पर तैनात स्टाफ उनसे ना यूनिफार्म और ना बैग, सिर्फ स्वास्थ्य और फेस मास्क के बारे में ही पूछ रहा था।
इंद्री स्कूल के प्रिंसिपल बीर सिंह राणा ने बताया कि हर बच्चे की जांच के बाद ही स्कूल में प्रवेश दिया गया। इसका रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। जिस विद्यार्थी का तापमान ज्यादा था, उसे वापस घर भेज दिया गया। निगदू स्कूल के प्रिंसिपल धर्मपाल ने बताया कि एक समय में केवल 50 विद्यार्थी ही विद्यालय में संवाद के लिए आ सकते है। इससे ज्यादा विद्यार्थियों को आने नहीं दिया गया।
गणित व साइंस के अधिकांश बच्चे आए
अध्यापकों से संवाद करने के लिए गांव पस्ताना, बीड-बडालवा, निगदू व कारसा डोड से सबसे ज्यादा कॉमर्स व विज्ञान के विद्यार्थी पहुंचे। अध्यापिका रीचा कालडा, विज्ञान शिक्षक नीरू, अंग्रेजी के अध्यापक जय भगवान व सालू, हिन्दी के अध्यापक रविन्द्र ओर अर्थशास्त्र के अध्यापक सुलिन्द्र ने बताया कि बच्चों की जो भी परेशानी थीं उनका समाधान किया गया।
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