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एनडीआरआई ने लॉन्च की इलायची कुल्फी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में बुधवार को विश्व दुग्ध दिवस पर बिना किसी रंग या प्रिजर्वेटिव के प्राकृतिक इलायची स्वाद वाली कुल्फी लॉन्च की गई। यह कुल्फी सस्ती और स्वादिष्ट है और संस्थान में इसके रासायनिक, सूक्ष्म जीवविज्ञानी व संवेदी गुणों के लिए परीक्षण किया गया है। वैज्ञानिकों ने कार्यक्रम में पहुंचे करीब 150 पुरुष और महिला प्रगतिशील किसानों, डेयरी उद्यमियों और गोशाला सदस्यों को उनकी दूध उत्पादन और प्रसंस्करण संबंधी समस्याओं के समाधान बताए।
संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि दूध इस समय दुनिया भर में लगभग एक अरब लोगों की आजीविका का स्रोत है। यह दिवस दूध पर ध्यान केंद्रित करने और स्वस्थ आहार, जिम्मेदार खाद्य उत्पादन, आजीविका और समुदायों का समर्थन करने में डेयरी के हिस्से के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। वर्ष 2001 से हर साल एक जून को विश्व दुग्ध दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा की गई थी।
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ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करके डेयरी को बनाएंगे टिकाऊ
निदेशक ने कहा कि इस वर्ष विश्व दुग्ध दिवस का विषय जलवायु परिवर्तन की समस्या की तरफ सभी का ध्यान आकर्षित करना है और डेयरी क्षेत्र में इसके प्रभाव को कैसे कम किया जाए। दुग्ध दिवस का लक्ष्य अगले 30 वर्षों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके और डेयरी क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करके ‘डेयरी नेट जीरो’ हासिल करना है।
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अब देसी नस्लों का विकास और संरक्षण होगा मिशन
निदेशक डॉ. चौहान ने कहा कि दूध एकलौता ऐसा पदार्थ है, जिसकी तुलना पूर्ण भोजन से की जाती है। दूध में कई पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर के लिए बेहद फायेदमंद होते हैं, जैसे प्रोटीन, वसा व विटामिन आदि। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों के दौरान दुग्ध उत्पादन 6.3 प्रतिशत प्रति वर्ष की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। जबकि विश्व दुग्ध उत्पादन 1.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 2013-14 में प्रति व्यक्ति 307 ग्राम से बढ़कर 2019-2020 में 406 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन हो गई है। हमारा भविष्य का मिशन होगा देसी नस्लों के विकास और संरक्षण, दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में वृद्धि करना और संगठित दूध खरीद में हिस्सेदारी बढ़ाना है। मौके पर संयुक्त निदेशक अनुसंधान डॉ. धीर सिंह, मॉडल डेयरी प्लांट प्रबंधक डॉ. ज्ञान मुत्रेजा, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके डांग व डॉ. सुरिंद्र सिंह लठवाल मौजूद रहे।
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