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Karnal News: शोध और व्यावसायिक विचार प्रतियोगिता में एनडीआरआई प्रथम

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134....एनडीआरआई में आयोजित सेमिनार में पद्म भूषण डॉ. आरएस परोदा को जानकारी देते एनडीआरआई के निद
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। एनडीआरआई ग्रेजुएट्स एलुमनी एसोसिएशन (एनजीएए) ने आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से शनिवार को ऑडिटोरियम में भारतीय डेयरी उद्योग के वैश्वीकरण पर 12वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर की शोध और व्यावसायिक विचार प्रतियोगिता मिल्काथॉन-2025 का आयोजन भी किया गया। टीम एनडीआरआई ने प्रथम पुरस्कार जीता।
मिल्काथॉन में देशभर के डेयरी विज्ञान महाविद्यालयों की लगभग 15 टीमों ने भाग लिया। सीडीएफएसटी रायपुर ने द्वितीय पुरस्कार जीता। सेमिनार के दौरान विजेताओं को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, छात्रों और शोधार्थियों के लिए पोस्टर प्रस्तुति भी आयोजित की गईं। समापन सत्र में आईसीएआर-एनडीआरआई के पूर्व छात्रों के प्लेटिनम, स्वर्ण और रजत जयंती बैचों को सम्मानित किया गया।
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इस अवसर पर डेयरी क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के सम्मान में, एनजीएए द्वारा डॉ. एके अग्रवाल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही, डॉ. पीएन राजू को शिक्षण और मार्गदर्शन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए एनजीएए द्वारा सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मापन सत्र के दौरान पोस्टर सत्र के विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया।



मुख्य अतिथि पद्म भूषण डॉ. आरएस परोदा ने उद्घाटन किया। उन्होंने आईसीएआर-एनडीआरआई में उत्कृष्टता केंद्र भवन की स्थापना में उनके योगदान के लिए डॉ. एसएस मान की सराहना की। उनके साथ निफ्टम सोनीपत के निदेशक डॉ. एचएस ओबेरॉय और सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम के निदेशक डॉ. सी आनंदरामकृष्णन ने भी अपने विचार साझा किए।
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जीन संपादित पशुओं पर कार्य की दी जानकारी


आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने उपस्थित लोगों को जीन-संपादित पशुओं पर एनडीआरआई के अत्याधुनिक कार्य और छात्रों को वैश्विक दक्षता विकसित करने के लिए विदेशों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र के बाद एक तकनीकी सत्र हुआ, जिसमें चार वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। डॉ. एचएस ओबेरॉय ने घरेलू और निर्यात गुणवत्ता मानकों के महत्व पर बल दिया और उत्पादन, बाजार पहुंच, बुनियादी ढांचे की कमी और ओटी-सक्षम प्रशीतन की आवश्यकता जैसी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. सी आनंदरामकृष्णन ने डेयरी और खाद्य क्षेत्र में दक्षता, पता लगाने की क्षमता और उत्पाद विकास को बढ़ाने में एआई और एमएल की भूमिका पर बात की। विपिन कक्कड़ ने भारत के डेयरी निर्यात परिदृश्य को रेखांकित किया। डॉ. टीएन तिवारी ने न्यूट्रास्युटिकल्स, विशेष रूप से शिशु पोषण, के बढ़ते दायरे पर प्रकाश डाला, जो 50-55 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बाजार है।
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