हिसार के श्यामलाल बाग की पर्वतारोही रीना भट्टी पहली बार अप्रैल में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने निकली थीं, मगर सिलिंडर में ऑक्सीजन कम होने के कारण महज 58 मीटर दूरी से उन्हें वापस लौटना पड़ा। पहले प्रयास में इतनी अधिक ऊंचाई तक पहुंचना भी आसान नहीं है। लेकिन रीना में जीत का जज्बा कम नहीं हुआ है। अब वे अगले साल फिर से माउंट एवरेस्ट को फतह करने निकलेंगी और अपना सपना पूरा करेंगी।
पर्वतारोही रीना बताती हैं कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8849 मीटर है। वह 8791 मीटर ऊंचाई पर हिलेरी स्टेप से वापस आना पड़ा। रीना ने 15 अगस्त 2022 को यूरोप की सबसे ऊंची चोटी एलब्रुस को फतह किया था। इसी प्रकार वर्ष 2019 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारों को फतह कर देश का तिरंगा फहराया था। वर्ष 2022 और वर्ष 2019 में दो बार माउंट फ्रेंडशिप पीक फतह की थी। रीना 23 मई को हिसार लौटी हैं।
हिसार के उकलाना के फरीदपुर गांव की बेटी पर्वतारोही अनीता कुंडू ने गत 17 मई को नेपाल में स्थित 8481 मीटर ऊंची चोटी माउंट मकालू पर तिरंगा फहराया है। इसकी ऊंचाई 8481 मीटर है। नेपाल व चीन की ओर से माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली अनीता कुंडू देश की पहली बेटी है। नेपाल की ओर से 2013 और चाइना की ओर से 2017 में कुंडू ने माउंट एवरेस्ट को फतह किया था।
तीन बार माउंट एवरेस्ट को फतह कर चुकी अनीता हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं। अनीता ने अपने अभियान की शुरुआत 24 अप्रैल को की थी। अनीता 2020 में राष्ट्रपति के हाथों एडवेंचर के सबसे बड़े अवॉर्ड तेनजिंग नोर्गे से सम्मानित हो चुकी हैं। अनीता तीन बार माउंट एवरेस्ट को फतह कर चुकी हैं।
पर्वतारोही अस्मिता दोरजी शर्मा झज्जर की बहू हैं। अस्मिता ने बगैर ऑक्सीजन के माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने का लक्ष्य रखा था। 26 हजार मीटर तक बगैर ऑक्सीजन के पहुंच भी गईं। लेकिन जब माउंट एवरेस्ट की चोटी मात्र 800 मीटर की दूरी पर रह गई थी, तब अस्मिता को ऑक्सीजन की कमी के कारण असहजता महसूस होने लगी। कुछ देर के लिए लगा कि एवरेस्ट पर पहुंचने का सपना पूरा नहीं होगा, लेकिन अस्मिता ने धैर्य नहीं खोया और अपने शेरपा की सलाह पर उन्हें ऑक्सीजन का सिलेंडर प्रयोग करना पड़ा। कुछ देर आराम करने करने के बाद अस्मिता दोरजी ने माउंट एवरेस्ट पर भारतीय शान तिरंगा झंडा लहराया।