कन्या भ्रूण लिंग जांच के दोषी रेडियोलॉजिस्ट एवं एक डॉक्टर को अदालत की ओर से दो-दो साल की कैद व दस हजार रुपये जुर्माना किया गया है। चार अक्तूबर को सजा होने पर नेशनल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से रेडियोलॉजिस्ट का पंजीकरण पांच साल के लिए निलंबित किया गया है।
इसके चलते जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार देर शाम शहर के निजी अल्ट्रासाउंड को सील कर दिया है। तरावड़ी स्थित निजी अस्पताल भी 2010 में सील किया जा चुका है। वर्ष 2009 में नीलोखेड़ी के एक नर्सिंग होम में भर्ती एक महिला का तरावड़ी में अल्ट्रासाउंड कराया गया था। इस मामले में आरोप था कि यहां महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जांच की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा लेकिन तब तक महिला वहां से निकल चुकी थी और डॉक्टर भी मौके पर नहीं मिला था। इस कारण महिला का गर्भपात नहीं हो पाया था और महिला ने तीसरी बेटी को जन्म दिया। तीसरी बेटी होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि गर्भ में बेटी होने के कारण डॉक्टर महिला का गर्भपात करने वाले थे लेकिन विभाग की सतर्कता के चलते यह नहीं हो पाया।
शिकायत के बाद पुलिस ने बीएमएस डॉक्टर जितेंद्र कालिया व रेडियोलॉजिस्ट डॉ. श्याम वधवा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। डॉ. वधवा तरावड़ी स्थित डॉ. जितेंद्र कालिया का अल्ट्रासाउंड ऑपरेट करते थे। मामला दर्ज होने के कुछ समय बाद पुलिस ने अस्पताल को सील कर दिया गया था। करनाल की कोर्ट ने डॉ. वधवा व डॉ. कालिया को दोषी करार देते हुए उन्हें दो-दो साल की कैद व दस-दस हजार रुपये जुर्माना किया है।
इसके बाद नेशनल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वधवा का पंजीकरण भी पांच साल के लिए निलंबित किया है। विभाग की टीम ने शुक्रवार देर शाम शहर के अल्ट्रासाउंड को सील कर दिया है। सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया ने बताया कि वर्ष 2009 में तरावड़ी के अस्पताल में महिला के गर्भ में लिंग जांच किया गया था। इस मामले में विभाग ने मुकदमा दर्ज कराया था और कुछ दिन पहले ही अदालत ने फैसला दिया है।
इस पर नेशनल काउंसिल ने डॉ. वधवा का पंजीकरण रद्द कर दिया है। शुक्रवार को उनका अल्ट्रासाउंड सेंटर सील कर दिया गया है।