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Karnal News: ठंड में सिकुड़ रही मांसपेशियां, जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ी

Sun, 07 Dec 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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मरीज की फिजियोथेरेपी करते हुए डॉक्टर चारु
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करनाल। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है लोगों में जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में मरीजों की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। रोजाना ओपीडी में आने वाले करीब 250 मरीजों में आधे जोड़ों के दर्द की समस्या बता रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार सर्दी में मांसपेशियां सिकुड़ने से समस्या अधिक आ रही है। पंजे, एड़ी, घुटनों, कमर और जोड़ों के दर्द की शिकायत लेकर आने वालों में सबसे ज्यादा महिलाएं हैं। युवाओं में पुरानी चोट का दर्द तेजी से बढ़ रहा है।
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नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से ओपीडी में लगातार भीड़ बढ़ रही है और इलाज के लिए मरीजों की कतार लग रही है। विगत सप्ताह में जोड़ों के दर्द की समस्या से पीड़ित करीब 250 मरीज रोजाना ओपीडी में आ रहे हैं। 35 फीसदी नए मरीज और बाकी फॉलोअप के हैं। पुराने मरीजों में गठिया और घुटने के दर्द वाले अधिक हैं। उन्होंने बताया कि 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में चलने-फिरने में दिक्कत की शिकायत बढ़ रही है, जबकि देर तक बैठकर काम करने वाले युवाओं में एड़ी, पंजे और कंधों में दर्द ज्यादा देखने को मिल रहा है। इनमें अधिकांश खिलाड़ी हैं।
डॉ. सौरभ ने बताया कि ठंड के कारण मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और जोड़ों के आसपास की नसें ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। इसी वजह से दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पुराने फ्रैक्चर और चोट का दर्द भी ठंड में दोबारा उभर आता है।
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फिजियोथेरेपी विभाग में भी बढ़ी भीड़
जिला नागरिक अस्पताल की फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. चारू के अनुसार, ठंडी हवा पुराने दर्द की समस्या को बढ़ा रही है। ओपीडी में मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। उनके अनुसार, सबसे ज्यादा घुटनों के दर्द, पंजा-एड़ी के दर्द, जोड़ों में जकड़न, पीठ व गर्दन का दर्द, टेनिस एल्बो, और सेक्रम बोन के दर्द के मरीज आ रहे हैं। इनमें 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक हैं। 30 से 40 उम्र के लोग बड़ी संख्या में थेरेपी लेने पहुंच रहे हैं। जहां सामान्य दिनों में करीब 40 मरीज आते थे, वहीं सर्दी बढ़ते ही यह संख्या 60 के आसपास पहुंच गई है।




- अल्ट्रासोनिक और टेंस थेरेपी के जरिये दी जा रही राहत
डॉ. चारू ने बताया कि अधिकतर मरीजों को अल्ट्रासोनिक और टेंस थेरेपी के जरिये राहत दी जा रही है। इन थेरेपी में दर्द वाले हिस्से पर जेल आधारित दवा लगाई जाती है, जिससे रक्त संचार बढ़ता है और सूजन कम होती है। टेंस थेरेपी में बहुत हल्के इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन से नसों में राहत दी जाती है।
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