फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस ने मर्डर के केस में फंसाया, अदालत ने तीनों को किया बरी

Tue, 08 Nov 2016 12:47 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
विज्ञापन
क्राइम - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
एक ट्रक चालक की हत्या के केस में तीन युवकों ने पांच साल तक जेल में यातनाएं सही, अब जिला अदालत ने तीनों को बा इज्जत बरी कर दिया है। पीड़ित ने हत्या के झूठे केस में फंसाने को लेकर तत्कालीन एसपी समेत कुल 12 पुलिस अधिकारियों और एक राइस मिलर को पार्टी बनाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। उधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए तीन माह में इस मामले में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही आईजी को इस मामले में विशेष निर्देश दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए डीजीपी जेल से रिपोर्ट तलब की है। मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है। 
विज्ञापन


मामले के अनुसार गांव गोंदर निवासी अमरजीत ट्रक चलाता है। 6 नवंबर, 2011 को करनाल पुलिस ने उसे घर से उठा लिया और उस पर गोहाना निवासी संजय की हत्या का आरोप लगाते हुए थर्ड डिग्री इस्तेमाल किया। उसके साथ ही दो अन्य राजेंद्र निवासी पंजाब व पप्पू निवासी यूपी को मर्डर के केस में गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ सीआईए 2 में रखकर मारपीट की गई और उसे एक राइस मिल में रखकर भी यातनाएं दी गई। बाद में पुलिस ने यूपी से मिले संजय के ट्रक को कागजों में उनसे ही बरामद भी दिखा दिया, जबकि यूपी पुलिस वह ट्रक लावारिस हालत में मिला था। आखिकार पुलिस ने तीनों को हत्याआरोपी करार उन्हें जेल भेज दिया गया। पिछले पांच साल से तीनों जेल में रहे। इसी दौरान उनका केस ट्रायल चलता रहा। 

29 फरवरी, 2016 को करनाल के अतिरिक्त सेशन जज आरके जैन ने तीनों को बा इज्जत बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित अमरजीत ने न्याय के लिए डीजीपी को शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका। आखिरकार उसने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित के वकील सुनील राणा ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस जसपाल सिंह ने 25 अक्तूबर, 2016 को डीजीपी को नोटिस जारी किया। साथ ही आईजी करनाल रेंज को निर्देश दिए कि पीड़ित की शिकायत पर तीन माह में संबंधित पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। वहीं, दूसरी ओर पीड़ित अमरजीत की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है और जेल में दी गई यातनाओं को लेकर डीजीपी जेल से तीन माह के अंदर इस पूरे केस की रिपोर्ट व रिकॉर्ड मांगा है। 
विज्ञापन


बता दें कि इससे पहले भी तत्कालीन सीआईए 2 प्रभारी मनोज वर्मा का रोहतक में ऐसा ही एक मामला सामने आ चुका है। रोहतक में भी मर्डर के मामले में युवकों को फंसाया गया था, बाद में इंस्पेक्टर को संस्पेंड कर दिया गया था। फिलहाल मनोज वर्मा पानीपत सीआईए में तैनात है। 

ये है मामला
नवंबर, 2011 में एक राइस मिल के पास तरावड़ी में गोहाना निवासी संजय लापता हो गया था। इस पर संजय के भाई की शिकायत पर पुलिस अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था। बाद में परिजनों की शिनाख्त पर पुलिस ने यूपी से संजय का शव बरामद किया था और हत्या का केस दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में उस समय राइस मिल में चावल लोडिंग के लिए तीनों चालकों अमरजीत, राजेंद्र व पप्पू को उठा लिया था। पीड़ित का आरोप है कि कई दिन तक अवैध हिरासत में रखे जाने के बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार दिखा दिया और जबरजस्ती उनसे हस्ताक्षर कराए।
इन पर हैं आरोप
न्याय के लिए भटक रहे अमरजीत ने उसको फंसाने में तत्कालीन एसपी राकेश आर्य, डीएसपी सुरेंद्र भोरिया, डीएसपी जोगेंद्र राठी, सीआईए-2 प्रभारी मनोज वर्मा, एसएचओ तरावड़ी बलजीत, एएसआई सतबीर सिंह, सतबीर, वेद हवलदार, मुंशी राकेश, सतबीर समेत, जेल में तैनात अधिकारियों समेत एक महेश राइस मिल के संचालक मुकेश गोयल को पार्टी बनाया है। पीड़ित ने प्रदेश के सीएम से भी न्याय की गुहार लगाई है। 

पुलिस ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी है, लेकिन अदालत ने दोबारा से जिंदगी दी है। मैं इस मामले में आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ूंगा और झूठे मामले में फंसाने वाले अधिकारियों को सजा दिलाकर ही दम लूं्गा, ताकि दोबारा से किसी निर्दोष को पुलिस न फंसा सके। वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। 
विज्ञापन

-अमरजीत, निवासी गोंदर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें