संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में घटते लिंगानुपात को सुधारने और गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग व स्वास्थ्य विभाग की ओर से 855 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1091 आशा वर्कर को सहेली के ताैर पर नियुक्त किया गया है। उनको बिटिया के जन्म के संबंध में विशेष जिम्मेदारी दी गई है, ताकि घटते लिंगानुपात को सुधारा जा सके।
महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी सीमा प्रसाद ने बताया कि सहेली योजना घटते लिंगानुपात को सुधारने के लिए लाभदायक रहेगी। गर्भवती महिला की सहेली उनके स्वास्थ्य, खानपान, जांच और जरूरी जांचों पर नजर रखेगी। कन्या भ्रूण परीक्षण न हो, इसकी भी पैनी निगरानी होगी। उन महिलाओं पर विशेष नजर रखी जाएगी, जिनके पास पहले से एक या दो बेटियां हैं। विभाग की ओर से असंध में 260, घराैंडा में 449, इंद्री में 139, निसिंग में 227, नीलोखेड़ी में 321, करनाल रूरल में 392 और अर्बन में 77 सहेलियों की नियुक्ति की गई है।
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जिनकी बेटियां, उनकी कड़ी निगरानी
प्रदेशभर में गिरते हुए लिंगानुपात को देखते हुए गर्भवती महिलाओं पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से नजर रखी जा रही है। सहेली से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की रोजाना रिपोर्ट मांगी जा रही है। इनमें यदि किसी महिला का गर्भपात होता है तो उसकी पूरी तरह से जांच की जाएगी, यदि गर्भपात का कारण गैरकानूनी लगता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिन महिलाओं की पहले से बेटियां है उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया है। -डॉ. शीनू चौधरी, डिप्टी सिविल सर्जन
स्वास्थ्य की जानकारी ले रही सहेली
संगोहा गांव की निवासी बबीता ने बताया कि वह 5 महीने की गर्भवती हैं। उनके एक बेटी है। उनके साथ एक आशा वर्कर सहेली जोड़ी गई है। उन्होंने बताया कि सहेली कड़ी निगरानी रख रही है। स्वास्थ्य जांच की हर जानकारी समय-समय पर लेती है। खानपान का ध्यान रख रही हैं। वह परिवार के लोगों के साथ बेटा-बेटी में फर्क नहीं करने के बारे में भी बात करती है।
एक सप्ताह पहले की गई नियुक्ति
टिकरी निवासी गर्भवती सुदेश ने बताया कि उनके पास पहले से एक बेटी है। गर्भावस्था में बेहद कमजोरी रहती है। एक हफ्ता पहले ही उनके साथ आशा वर्कर को सहेली के ताैर पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि सहेली समय पर खून की जांच और पोषण युक्त खाना उपलब्ध करवा रही हैं। प्रदेश सरकार की इस पहल से बेटियों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।