करनाल। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह तिथि एक दिसंबर को पड़ रही है। श्री श्याम बाला ज्याेतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
उन्होंने बताया कि इस दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए मोक्षदा एकादशी पर गीता जयंती भी मनाई जाती हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व पिंडदान जैसे कार्य करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। श्रीहरि को पीली चीजों का भोग लगाने से लंबे समय से अटके काम पूरे और विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर होने की भी मान्यता है।उन्होंने बताया कि मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह 8 बजकर 20 मिनट से शाम 7 बजकर एक मिनट तक भद्रा है। इस अवधि में पूजा-पाठ से जुड़े कार्य न करें। इस एकादशी पर पंचक भी बने रहेंगे। इस दिन सुबह 6 बजकर 56 मिनट से रात 11 बजकर 18 मिनट तक पंचक है। मोक्षदा एकादशी तिथि का शुभारंभ 30 नवंबर रविवार रात को 9 बजकर 29 मिनट पर होगा। समापन एक दिसंबर को शाम 7:01 बजे होगा।