करनाल। कोरोना काल में जब पूरे देश में लॉकडाउन था तो केवल इंटरनेट ही सबका साथी बना। पढ़ाई हो या व्यापार, सब कुछ डिजिटल मंच पर आ गया था, लेकिन अब किसान आंदोलन के इस तनावपूर्ण माहौल में करनाल का इंटरनेट बंद किया गया, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और अफवाहें न फैले। लेकिन इसका असर मोबाइल नेट के माध्यम से होनेे वाले लाखों रुपये के व्यापार पर भी पड़ा है।
सबसे ज्यादा झटका उन फूड डिलीवरी ब्वॉयज को लगा है, जो मोबाइल एप पर आने वाले ऑर्डर के आधार पर खाना देने जाते थे। सोमवार शाम को इंटरनेट बंद होने के बाद इनके पास एक भी ऑर्डर नहीं आया। ऐसे में बाजारों में दो पहिया वाहनों पर देर रात तक खाना सप्लाई करने वाले डिलीवरी ब्वॉय दिखाई नहीं दिए। इधर पेट्रोल पंप समेत अन्य व्यापारी प्रतिष्ठानों एवं दुकानों पर भी ऑनलाइन भुगतान नहीं हो सका।
हमारी पास व्यवस्था थी फिर भी नहीं आए खाने के आर्डर
एक निजी कंपनी के मैनेजर अशोक के अनुसार, उनके पास रोजाना काफी संख्या में अलग-अलग होटल और रेस्टोरेंट से खाना डिलीवरी के ऑर्डर रहते हैं। ज्यादातर ऑर्डर शाम के समय ही होते हैं। लेकिन शाम को इंटरनेट बंद होने के बाद ऑर्डर नहीं आए। हालांकि उनकी कंपनी ने एप चलाने की वैकल्पिक व्यवस्था कर ली थी, लेकिन मोबाइल में इंटरनेट बंद होने से ऑर्डर नहीं मिले।
एप न चलने से 30 प्रतिशत व्यापार पर पड़ा असर
वहीं, बाजारों में कई शॉपिंग मॉल और रेस्टोरेंट में रोजाना 30 प्रतिशत से ज्यादा व्यापार ऑनलाइन माध्यम में होता है। ऐसे में शाम को नेट बंद होने के बाद पेटीएम और अन्य डिजिटल पेमेंट पर भी ब्रेक लगा। मॉडल टाउन के एक मॉल के संचालक अमित और कुंजपुरा रोड स्थित एक मॉल के संचालक गोपाल ने बताया कि लोगों ने नकदी में शॉपिंग की।
स्कूल भी नहीं खुले और घर से भी नहीं पढ़े
किसानों के आंदोलन के चलते कई स्कूल भी मंगलवार को बंद रहे। हालांकि स्कूलों की ओर से ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई थी। लेकिन मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद होने से बच्चे घरों में भी पढ़ाई नहीं कर पाए। कॉलेजों में चल रही दाखिला प्रक्रिया पर भी इसका थोड़ा असर पड़ा।
टीकाकरण कराने में भी आई दिक्कत
कोरोना सुरक्षा के लिए होने वाले टीकाकरण का पंजीकरण भी ऑनलाइन होता है। मंगलवार को नेट न चलने के कारण लोग पंजीकरण नहीं करा पाए। जिले में कुल 19 जगहों पर टीकाकरण होना था। लेकिन इंटरनेट व्यवस्था न हो पाने व किसानों के आंदोलन के चलते 9 जगह केंद्र नहीं बने। शेष 10 केंद्रों पर भी महज 2143 लोगों को ही डोज लग पाई।