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दवा के नाम पर लंबी कतारें और जिल्लत

Tue, 06 Sep 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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दवाइयों के लिए कतार में लगे लोग - फोटो : अमर उजाला
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जिले के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए बनाए गए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इन दिनों जरूरी दवाइयों का टोटा बना हुआ है। आलम यह है कि बीपी और दर्द निवारक दवाइयां तक खत्म हो चुकी हैं। यहां तक कि इमरजेंसी के दौरान दी जाने वाली दवाइयों का स्टाक भी सप्ताह पहले समाप्त हो चुका है। दवाइयों के लिए घंटों मरीज लाइनों में लगते हैं, इसके बाद उन्हें टका सा जवाब मिलता है दवाइयां नहीं है, बाहर से लो। ये हाल तो तब है जब बार-बार प्रबंधन को इसकी सूचना दी गई है, बावजूद इसके न तो प्रबंधन दवाइयों का इंतजाम करा पा रहा है और न ही सरकार। ऐसे में लोगों को केमिस्टों की शाप से महंगे दामों पर दवाइयां लेनी पड़ रही हैं।
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स्थिति इतनी गंभीर है कि करीब 85 प्रकार की दवाइयां दवा खिड़की पर नहीं है। सीएम सिटी के मेडिकल कॉलेज के ये हालात आज से नहीं है, बल्कि पिछले तीन माह से यही स्थिति है। शहर में बना मेडिकल कॉलेज जिले सहित आसपास के जिलों के लिए भी महत्वपूर्ण है। मेडिकल कॉलेज बनने से मरीजों को रोहतक, चंडीगढ़ पीजीआई के कम चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की दवाई खत्म होना बड़ी समस्या है। बता दें कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रोजाना की ओपीडी 1300 मरीजों की है, जो डॉक्टर से इलाज करवाकर दवाई लेने के लिए लाइन में लगते हैं। दवाई कम होने से इक्का दुक्का दवाई ही मिल पाती है। मरीजों को दवा न मिलने पर निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है।  

85 प्रकार की दवाईयां खत्म
सरकार ने सरकारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में फ्री इलाज की व्यवस्था की हुई है। अस्पतालों में करीब 170 प्रकार की दवाईयां फ्री में दी जाती हैं और डॉक्टर भी 170 प्रकार की दवाइयां ही लिख सकते हैं। ऐसे में अस्पताल में 85 प्रकार की दवाईयों का स्टॉक खत्म हो गया है और अब 85 प्रकार की दवाईयों के अलावा अन्य दवाई लेने के लिए निजी मेडिकल स्टोरों पर जाना पड़ रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों ने भी परेशानी जाहिर की है और उनका कहना है कि यदि मरीज को दवाई खत्म होने के लिए बोलते हैं तो वह झगड़ा करते हैं। -
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जीवन रक्षक दवाइयां भी नहीं
सामान्य दवाइयों के अलावा इमरजेंसी में दिए जाने वाली जीवन रक्षक दवाइयों का भी स्टॉक खत्म है। इस कंडीशन में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को दवाईयों के लिए बाहर निजी दुकानों तक दौड़ लगानी पड़ रही है, लेकिन इमरजेंसी में दी जाने वाली दवाईयों का स्टॉक करने में भी अस्पताल प्रबंधन गंभीरता नहीं दिखा रहा है। कोई भी सीरियस केस यहां पर आता है तो उसे आते ही रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां पर मरीज को बचाने के लिए दुआ के अलावा कुछ भी नहीं है। बता दें कि करनाल स्थित ट्रामा सेंटर में रोजाना सौ से ज्यादा मरीज आते हैं।

यहां इलाज चाहिए तो बस दुआ कीजिए
सोमवार को दवा खिड़की पर दवा लेने आए स्टौैंडी के रोशन लाल ने बताया कि दवाइयों के लिए वह डेढ़ घंटे तक लाइन में खड़ा रहा, जब नंबर आया तो कह दिया गया कि बाहर से दवाइयां ले लें, यहां पर खत्म हैं। उसे बीपी की प्राब्लम है, बाहर से काफी महंगी दवाइयां मिलती है। कलवेहड़ी व कुंजपुरा से आई कमलेश व वजीर सिंह ने बताया कि यहां पर लाइनों में लगना बेकार है, हर बार यही कहा जाता है कि दवाइयां खत्म हैं, तो फिर क्यों नहीं दवा खिड़की के बाहर बोर्ड लगाया जाता कि यहां पर दवाइयां नहीं मिलती हैं। सांस के मरीज देवेंद्र कुमार ने बताया कि यहां दवा नहीं मिलती है, अगर यहां पर इलाज कराना है तो बस दुआ करते रहते रहिये, दवाइयों के भरोसे तो मर ही जाना है।

इन दवाइयों की संख्या कम
दवाई : उपयोग
1. डेरीफाइलीन : श्वास के मरीजों के  लिए
2. एट्रोपिन : प्वायजन न्यूट्रल करने को
3. एड्रेलीन : ब्लीडिंग रोकने के लिए
4. डेकाड्रान : पल्स लो होने पर दी जाने वाली
5. जेंटामाइसिन : एंटीबायोटिक
6. एसीलॉक : गैस के लिए
7. इस्कार्लिंग : जीवन रक्षक दवा
8. इप्सोलिन : झटका रोकने के लिए
9. एबकार्लिन : जीवन रक्षक दवा
10. इसाइलेट : ब्लीडिंग रोकने के  लिए  
11. दर्द निवारक नहीं है
12. हीमोफिलिया का इंजेक्शन नहीं, बीपी की भी नहीं

जो दवाइयां नहीं हैं, उनकी लिस्ट बाहर लगे : शर्मा
इस बारे में रिटायर्ड आईजी रणबीर शर्मा का कहना है कि यह बहुत चिंता का विषय है कि सीएम के शहर के मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बीपी की दवा भी नहीं मिल पा रही है, इससे ज्यादा शर्म की और क्या बात हो सकती है। शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार का किसी भी चीज पर कंट्रोल नहीं है, इसलिए सैकड़ों लोगों को बाहर से मंहगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। शहर के लोगों को भी इस समस्या के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। सबसे जरूरी है कि दवा खिड़की के बाहर उपलब्ध और नहीं उपलब्ध दवाइयों की लिस्ट लगानी चाहिए, ताकि मरीजों को बेवजह लाइनों में न लगना पड़े।

वर्जन
दवाइयों की स्थिति को लेकर लगातार आला अधिकारियों को सूचित किया जाता है। फिलहाल पूरा प्रयास किया जा रहा है कि मरीजों को दवाइयां सुचारू रूप से मिल सकें।
- योगेश शर्मा, उप चिकित्सा अधीक्षक।

वर्जन
मेरे को जानकारी नहीं : डायरेक्टर
कई दवाईयों का स्टॉक खत्म होने की जानकारी मेरे पास नहीं है। दवाइयों का स्टॉक लगातार पहुंचता रहता है। मरीजों के लिए हर प्रकार की दवाई का रहना जरूरी है। यदि दवाई खत्म हुई है तो मंगवाई जाएगी।
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- डॉ. सुरेंद्र कश्यप, डायरेक्टर, मेडिकल कालेज, करनाल।
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